RANCHI : झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच राज्य की पहली महिला IPS अधिकारी तदाशा मिश्रा का नाम चर्चा में है. तदाशा मिश्रा झारखंड में DGP रैंक पर प्रमोशन पाने वाली पहली और फिलहाल एकमात्र महिला IPS अधिकारी हैं. दरअसल, झारखंड में DGP की नियुक्ति से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. इस दौरान झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सरकार का पक्ष रखा. राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि DGP की नियुक्ति से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है.
महिला अधिकारी को DGP पद का अवसर देने की बात
राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि नियमों में किए गए बदलाव का एक उद्देश्य महिला अधिकारियों को भी DGP पद के लिए अवसर उपलब्ध कराना है. इसी संदर्भ में तदाशा मिश्रा का उल्लेख किया गया. सरकार ने बताया कि तदाशा मिश्रा झारखंड में DGP रैंक तक प्रमोशन पाने वाली एकमात्र महिला IPS अधिकारी हैं. सरकार की ओर से उनके नक्सलवाद और अपराध के खिलाफ किए गए काम का भी हवाला दिया गया.
बाबूलाल मरांडी की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल
वहीं, मामले में याचिकाकर्ता बाबूलाल मरांडी की ओर से झारखंड में DGP की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. उनकी ओर से अदालत में आरोप लगाया गया कि राज्य में DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया में मनमानी होती रही है. मामले में एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में भी DGP नियुक्ति से जुड़े नियम के नियम 5 में किए गए बदलाव पर आपत्ति जताई गई है. अब राज्य सरकार इस रिपोर्ट और उठाई गई आपत्तियों पर अपना पक्ष अदालत के सामने रखेगी.
आज सुप्रीम कोर्ट में फिर होगी सुनवाई
झारखंड DGP नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज यानी 24 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई होनी है. ऐसे में नजर इस बात पर है कि अदालत DGP की नियुक्ति प्रक्रिया और बदले गए नियमों को लेकर क्या दिशा-निर्देश देती है.
