RANCHI : झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 30 सितंबर को झारखंड बंद का आह्वान किया है. मोर्चा का कहना है कि राज्य गठन के 26 वर्ष पूरे होने के बावजूद आंदोलनकारियों की कई मांगों पर सरकार की ओर से अब तक ठोस पहल नहीं की गई है.

सरकार के आश्वासन पर अमल नहीं होने का आरोप
झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि सरकार की ओर से समय-समय पर उनकी मांगों को लेकर संकल्प और आश्वासन दिए गए, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई. इसी के विरोध में आंदोलनकारियों ने बंद का आह्वान किया है.
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मोर्चा का कहना है कि झारखंड आंदोलन में योगदान देने वाले आंदोलनकारियों के साथ-साथ किसानों और विस्थापितों के अधिकारों को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनकी मांग है कि प्रभावित लोगों को न्याय के साथ सम्मान मिले और वे समाज में स्वाभिमान के साथ जीवन जी सकें.
15 नवंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन की चेतावनी
आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने सरकार को आगे के आंदोलन की भी चेतावनी दी है. मोर्चा के अनुसार, यदि उनकी मांगों को लेकर सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो 15 नवंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया जाएगा.
आंदोलनकारियों का कहना है कि झारखंड राज्य के गठन के पीछे लंबे संघर्ष और बलिदान की भूमिका रही है. ऐसे में आंदोलनकारियों की लंबित मांगों का समाधान किया जाना जरूरी है.
सरकार से ठोस निर्णय की मांग
मोर्चा ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निर्णय लेने की अपील की है.आंदोलनकारियों का कहना है कि केवल आश्वासन देने के बजाय उनकी मांगों को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए.
अब देखना होगा कि 30 सितंबर के बंद के बाद सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या पहल करती है और 15 नवंबर को प्रस्तावित आमरण अनशन को टालने के लिए कोई समाधान निकलता है या नहीं.
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