DHANBAD : राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की रोक और प्रशासनिक दावों के बावजूद धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन और भंडारण का खेल धड़ल्ले से जारी है. जामताड़ा और धनबाद की सीमा से गुजरने वाली नदी में रोजाना सुबह करीब 3 बजे से दोपहर 12 बजे तक नावों के जरिए नदी के बीच से बालू का उठाव किया जा रहा है. इसके बाद ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू को नदी किनारे और NH-419 के दोनों ओर बड़े पैमाने पर अवैध रूप से भंडारित किया जा रहा है.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बालू माफिया इतने बेखौफ हैं कि उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं है. नदी किनारे लाखों टन बालू का भंडारण खुलेआम दिखाई देता है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती. सवाल यह भी उठ रहा है कि जब इतने बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार चल रहा है, तो धनबाद जिला प्रशासन और जिला खनन विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं है?

DMO से संपर्क नहीं, प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
मामले में जब जिला खनन पदाधिकारी (DMO) से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन तक रिसीव नहीं किया. ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक संरक्षण के कारण यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है.

बालू खनन से पुल की सुरक्षा पर मंडराया खतरा
सबसे गंभीर बात यह है कि नदी में अत्यधिक बालू खनन का असर अब वहां बने पुल के पिलरों पर भी दिखाई देने लगा है. तकनीकी जानकारों के अनुसार अत्यधिक खनन के कारण नदी के भीतर पिलरों के आसपास का बालू हट रहा है, जिससे स्कॉरिंग (Scouring) की स्थिति पैदा हो रही है. कई स्थानों पर पुल की नींव से जुड़े हिस्से उजागर होते दिखाई दे रहे हैं. धनबाद के उपायुक्त (DC) और जिला खनन पदाधिकारी (DMO) को इन सवालों का जवाब देना चाहिए, क्योंकि मामला सिर्फ अवैध खनन का नहीं, बल्कि राजस्व हानि, पर्यावरणीय नुकसान और आम लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो अवैध बालू खनन का यह खेल किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है.

