RANCHI : हजारीबाग जिले में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था डॉक्टरों की भारी कमी के कारण गंभीर संकट से गुजर रही है. प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ माना जाता है, लेकिन चिकित्सकों के अभाव में इन केंद्रों का संचालन बड़ी मुश्किल से हो पा रहा है. जिले में कुल 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), 18 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), एक सब डिविजनल हॉस्पिटल और 56 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं. इसके बावजूद अधिकांश अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक नहीं होने से मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है.

डॉक्टरों की कमी से मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है
जिले में कुल 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), 18 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), एक सब डिविजनल हॉस्पिटल और 56 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं. इसके बावजूद अधिकांश अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक नहीं होने से मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है. जानकारी के अनुसार, जिले में 150 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल केवल 70 डॉक्टर कार्यरत हैं. इनमें से 10 चिकित्सक स्टडी लीव पर हैं, 3 बिना सूचना अनुपस्थित हैं और 4 डॉक्टर विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियों में लगे हुए हैं. ऐसे में महज 52 चिकित्सकों के भरोसे पूरे जिले की स्वास्थ्य सेवा संचालित हो रही है.
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सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने भी जिले में चिकित्सकों की कमी स्वीकार करते हुए कहा कि उपलब्ध डॉक्टरों से ही स्वास्थ्य सेवाएं संचालित की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि कोशिश की जा रही है कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में समय पर चिकित्सक उपलब्ध हों, ताकि मरीजों को परेशानी कम हो. इचाक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इसका बड़ा उदाहरण है. यहां 10 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 2 चिकित्सक कार्यरत हैं. अस्पताल में लैब, दवा, ऑपरेशन थिएटर और नर्सिंग सुविधा मौजूद है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है. यहां तक कि अस्पताल में अपनी एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं है और मरीज 108 सेवा पर निर्भर हैं.
वहीं बरकट्ठा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 8 एमबीबीएस डॉक्टरों के पद हैं, लेकिन केवल 4 डॉक्टर सेवा दे रहे हैं. NH-2 के किनारे होने के कारण यहां दुर्घटना के मामले लगातार आते हैं, फिर भी संसाधनों के अनुरूप चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है. चौपारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है. यहां 8 पदों के विरुद्ध 4 डॉक्टर कार्यरत हैं. भवन और बुनियादी सुविधाएं बेहतर होने के बावजूद डॉक्टरों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर करना पड़ता है.
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ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों की यह स्थिति मरीजों की मुश्किलें बढ़ा रही है. मजबूरी में लोगों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक डॉक्टरों की संख्या नहीं बढ़ाई जाती, तब तक ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है.
