RANCHI : फसल बीमा योजना को ज्यादा सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया है. अब फसल बीमा का लाभ लेने के लिए किसान आईडी अनिवार्य करने की तैयारी है. भारत सरकार के निदेशक (फसल बीमा) चंद्रजीत चटर्जी ने इस संबंध में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, कृषि सचिवों और कृषि निदेशकों को जानकारी दी है. नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य फसल बीमा योजना में वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित करना है. किसान आईडी को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने के बाद गलत पहचान या फर्जी तरीके से बीमा योजना में शामिल होने वाले लोगों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. इससे बीमा प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा .
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एग्रीस्टैक से जुड़ेगी किसान की डिजिटल पहचान
किसानों की डिजिटल पहचान तैयार करने के लिए एग्रीस्टैक योजना के तहत किसान आईडी बनाई जा रही है. इसमें किसान से जुड़ी जरूरी जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे कृषि क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न सेवाओं को एक ही डिजिटल पहचान के माध्यम से उपलब्ध कराने में आसानी होगी.
कागजी प्रक्रिया से मिल सकती है राहत
नई व्यवस्था में किसानों को फसल बीमा के लिए बार-बार अलग-अलग कागजी दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम हो सकती है. किसान आईडी के आधार पर पंजीकरण को पेपरलेस बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है. इससे आवेदन प्रक्रिया आसान होने के साथ किसानों का समय और मेहनत भी बच सकती है.
दूसरी कृषि सेवाओं में भी होगा इस्तेमाल
किसान आईडी को सिर्फ फसल बीमा तक सीमित रखने की योजना नहीं है. भविष्य में इसे कृषि क्षेत्र की दूसरी डिजिटल सेवाओं से भी जोड़ा जा सकता है. इससे किसानों तक योजनाओं और सेवाओं की पहुंच अधिक लक्षित और पारदर्शी तरीके से बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा किसान आईडी को किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के डेटाबेस से जोड़ने की संभावना पर भी चर्चा हुई है. इससे एफपीओ से जुड़े किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और भविष्य में कृषि क्षेत्र की अन्य डिजिटल सुविधाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिल सकती है.
