RANCHI : एक अभ्यर्थी, एक कथित बिचौलिया, बैंक खातों से निकले 15.90 लाख रुपये और एक ऐसी OMR शीट, जिसमें कैंडिडेट कॉपी के मुकाबले 51 जवाब ज्यादा मिले. 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच में सामने आई ये कड़ियां अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है अगर अभ्यर्थी की कॉपी में सिर्फ 48 जवाब थे, तो मूल OMR में 99 जवाब कैसे पहुंच गए? CID की जांच में अब बैंक ट्रांजैक्शन से लेकर डिजिटल चैट और OMR रिकॉर्ड तक की कड़ियां खंगाली जा रही हैं. सुमन सौरव उर्फ सौरव सुमन इस मामले में गिरफ्तार हो चुका है और उसकी जमानत याचिका भी सितंबर में अदालत ने खारिज कर दी थी.
पहले सामने आया 15.90 लाख का ‘मनी ट्रेल’
जांच की कहानी का पहला सिरा बैंक खातों तक पहुंचता है. सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुमन सौरव के परिवार से जुड़े बैंक खातों से कथित बिचौलिए पवन कुमार सिंह के खाते में UPI और RTGS के जरिए करीब 15.90 लाख रुपये भेजे गए. जांच में आरोप है कि परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए सुमन ने पवन से संपर्क किया था. CID अब इस वित्तीय लेन-देन को कथित परीक्षा ‘सेटिंग’ से जोड़कर जांच रही है. कहानी सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं रही. अगली कड़ी OMR शीट तक पहुंची और यहीं से मामला और गंभीर हो गया.
कैंडिडेट कॉपी में 48 जवाब, मूल OMR में 99
जांच में सुमन की कथित कैंडिडेट/कार्बन कॉपी और सुरक्षित मूल OMR के बीच बड़ा अंतर सामने आने की बात कही गई है. सामने आई जांच संबंधी जानकारी के अनुसार, पेपर-दो की कैंडिडेट कॉपी में 48 उत्तर चिह्नित थे, जबकि मूल OMR और सर्वर से मिली स्कैन कॉपी में 99 उत्तर दर्ज पाए गए. यानी दोनों के बीच 51 उत्तरों का अंतर. और सवाल सिर्फ संख्या का नहीं है. जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिन जगहों पर कैंडिडेट कॉपी में जवाब खाली बताए गए, उन्हीं जगहों पर मूल OMR में अतिरिक्त उत्तर मिलने का दावा है. CID अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह अंतर कैसे आया और क्या परीक्षा रिकॉर्ड में बाद में किसी स्तर पर छेड़छाड़ हुई थी.
पैसे गए… फिर OMR बदली? इसी सवाल की जांच
यही वह बिंदु है जहां मनी ट्रेल और OMR का अंतर एक-दूसरे से जुड़ते नजर आते हैं. हालांकि, पैसे का लेन-देन अपने आप यह साबित नहीं करता कि OMR में उसी के बदले बदलाव हुआ. यह संबंध जांच का विषय है. CID बैंक रिकॉर्ड के साथ कथित WhatsApp चैट की कड़ियां भी खंगाल रही है. जांच में सुमन और पवन के बीच संपर्क की बात सामने आई है.
एक अभ्यर्थी से आगे बढ़ी जांच, सामने आया बड़ा नेटवर्क
इस मामले की जांच आगे बढ़ी तो कहानी सिर्फ एक अभ्यर्थी तक सीमित नहीं रही. एक अन्य आरोपी बुद्धेश्वर भगत से जुड़ी जांच में 24 अभ्यर्थियों के कथित संपर्क की जानकारी सामने आई. प्रकाशित जांच विवरणों के अनुसार, इनमें से 11 अभ्यर्थियों से प्रारंभिक परीक्षा में कथित सेटिंग के नाम पर कुल 1.10 करोड़ रुपये लिए जाने का आरोप सामने आया. जांच में बुद्धेश्वर से जुड़े कथित बयान के आधार पर यह भी सामने आया कि अंतिम चयन के लिए अलग-अलग श्रेणियों में बड़ी रकम तय किए जाने का आरोप है. सामान्य/OBC श्रेणी के लिए कथित तौर पर एक करोड़ रुपये और SC/ST श्रेणी के लिए 80 लाख रुपये तक की रकम की बात सामने आई है. ये दावे जांच में आरोपी से मिली जानकारी पर आधारित हैं, अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं.
अब CID के सामने कई सवाल
इस पूरे मामले में जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित बिचौलियों का नेटवर्क परीक्षा व्यवस्था के भीतर कहां तक पहुंचा था. परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड तक पहुंच किसकी थी? OMR में मिले अंतर की वजह क्या थी? कथित भुगतान और परीक्षा परिणाम के बीच कोई सीधा संबंध था या नहीं? और 24 अभ्यर्थियों से जुड़े नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी? CID की कार्रवाई में परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी से जुड़े लोगों और कथित बिचौलियों समेत कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. फिलहाल 15.90 लाख रुपये का मनी ट्रेल और OMR में 51 उत्तरों का अंतर इस जांच के दो अहम बिंदु हैं. लेकिन इनसे जुड़े आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी.
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