RANCHI : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर जांच में नए खुलासे सामने आए हैं. CID के अनुसार, परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज और अभ्यर्थियों की OMR शीट के विश्लेषण में कई ऐसी विसंगतियां मिलीं, जिनसे परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. जांच में कुछ अभ्यर्थियों के परीक्षा के दौरान सोने या जम्हाई लेने, कम प्रश्न हल करने और OMR शीट में दर्ज उत्तरों के बीच अंतर होने की बात सामने आई है.
परीक्षा में सोते रहे अभ्यर्थी, OMR में मिले कई सही उत्तर
CID की जांच से जुड़े विवरण के मुताबिक, एक परीक्षा केंद्र के CCTV फुटेज में कुछ अभ्यर्थी परीक्षा के दौरान सोते और जम्हाई लेते दिखाई दिए. इसके बावजूद उनकी OMR शीट की जांच में दोनों पेपर में क्रमशः 91 और 92 सही उत्तर मिलने की बात कही गई है. जांच में एक अन्य मामले में CCTV फुटेज के आधार पर अभ्यर्थियों द्वारा हल किए गए प्रश्नों की संख्या और OMR शीट में दर्ज उत्तरों के बीच अंतर पाए जाने का दावा किया गया है. उपलब्ध विवरण के अनुसार, संबंधित अभ्यर्थियों ने दोनों पेपर में लगभग 49 और 30 प्रश्न हल किए थे, जबकि OMR शीट में क्रमशः 98 और 92 उत्तर दर्ज मिले. इन विसंगतियों को जांच एजेंसी ने परीक्षा में संभावित अनियमितताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना है. हालांकि, इन मामलों में संबंधित अभ्यर्थियों की भूमिका और कथित गड़बड़ी की प्रकृति का अंतिम निर्धारण जांच के निष्कर्षों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा.
OMR खाली छोड़ी, फिर भी मिले 292 अंक?
जांच से जुड़े विवरण में एक अभ्यर्थी का मामला भी सामने आया है, जिसे 292 अंक मिलने की बात कही गई है. आरोप है कि परीक्षा केंद्र के CCTV फुटेज में वह सोता और जम्हाई लेता दिखाई दिया तथा उसने OMR शीट में गोले नहीं भरे थे. CID से जुड़े विवरण के मुताबिक, बाद में संबंधित अभ्यर्थी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने OMR शीट खाली छोड़ी थी और कार्बन कॉपी जला दी थी.
जांच में कार्बन कॉपी में केवल 31 उत्तर दर्ज होने, जबकि मूल OMR शीट में 147 उत्तर मिलने का भी उल्लेख है. इसके अलावा, अभ्यर्थी के मोबाइल में मौजूद एक वीडियो में मूल OMR प्रति स्ट्रांग रूम के बाहर TDPL कर्मियों के पास दिखाई देने का दावा किया गया है.यदि इन तथ्यों की जांच में पुष्टि होती है, तो यह OMR शीट की सुरक्षा, अभिरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है.
अभय तिवारी और उसके करीबियों की सफलता भी जांच के दायरे में
CID की जांच में अभय तिवारी की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता और उसके कथित नेटवर्क की भी चर्चा है. उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अभय तिवारी ACF, FRO और खाद्य सुरक्षा अधिकारी की परीक्षाओं में सफल हुआ था. जांच में आरोप लगाया गया है कि उसकी पत्नी, भाई और साला भी कथित सेटिंग के जरिए 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) में सफल हुए. इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच एजेंसी के साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होना है.
एजेंट के लैपटॉप में परिणाम से पहले अभ्यर्थियों की सूची मिलने का दावा
जांच के विवरण में एजेंट बुदेश्वर भगत का नाम भी सामने आया है. आरोप है कि उससे जुड़े 11 अभ्यर्थी 14वीं PT में सफल हुए थे. इसके अलावा, उसके लैपटॉप में 24 अभ्यर्थियों की एक सूची परिणाम घोषित होने से करीब दो महीने पहले मिलने की बात कही गई है. जांच से जुड़े विवरण के मुताबिक, उस अवधि में OMR शीट TDPL के पास थीं. इस आधार पर जांच एजेंसी ने परीक्षा सामग्री की सुरक्षा और अभ्यर्थियों के परिणाम से जुड़े संभावित पूर्वानुमान या अनधिकृत पहुंच की पड़ताल की.
OMR स्कैनिंग के दौरान CCTV बंद होने का आरोप
CID की जांच में OMR शीट और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग से जुड़े स्थानों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं. आरोप है कि जिन जगहों पर स्कैनिंग का काम किया जा रहा था, वहां CCTV कैमरे चालू नहीं थे या उनकी निगरानी नहीं की जा रही थी. जांच एजेंसी के अनुसार, इससे परीक्षा सामग्री के साथ संभावित छेड़छाड़ की आशंका की पड़ताल जरूरी हो जाती है. जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा और निगरानी की कमियों के कारण डिजिटल साक्ष्य जुटाने की संभावना प्रभावित हुई.
JPSC परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे गंभीर सवाल
CCTV फुटेज, OMR शीट, कार्बन कॉपी और अभ्यर्थियों की सूची से जुड़े इन दावों ने JPSC परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं. जांच का प्रमुख पहलू यह है कि परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की वास्तविक गतिविधियों और बाद में OMR शीट पर दर्ज उत्तरों के बीच कथित अंतर कैसे आया. हालांकि, इन सभी आरोपों को अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता. मामले में जांच एजेंसी के निष्कर्ष, संबंधित पक्षों का जवाब और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य ही आरोपों की वास्तविकता निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होंगे.
