RANCHI / MEDININAGAR : झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) की केंद्रीय उपाध्यक्ष आइसा सिंह किन्नर ने पार्टी की सदस्यता और अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. 24 अक्टूबर 2026 को सामने आए उनके इस फैसले के बाद झारखंड की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है.
आइसा सिंह ने पार्टी के कुछ नेताओं की कार्यशैली, कथित गुटबाजी और सम्मान नहीं मिलने को अपने फैसले की प्रमुख वजह बताया है.आइसा सिंह किन्नर को पलामू प्रमंडल में JLKM के संगठन विस्तार के लिए सक्रिय चेहरों में गिना जाता रहा है. ऐसे में उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए, खासकर पलामू क्षेत्र में, एक राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.
जनवरी 2026 में JLKM में हुई थीं शामिल
आइसा सिंह किन्नर 30 जनवरी 2026 को जयराम महतो के नेतृत्व वाली JLKM में शामिल हुई थीं. पार्टी में आने से पहले उनकी पहचान मेदिनीनगर क्षेत्र में सामाजिक कार्यकर्ता और किन्नर समुदाय की प्रतिनिधि के रूप में थी. पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने आगामी मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव में महापौर पद के लिए JLKM समर्थित उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की मंशा जताई थी. उनके पार्टी से जुड़ने को पलामू प्रमंडल में संगठन का विस्तार करने की दिशा में एक अहम कदम माना गया था.

पलामू में संगठन विस्तार पर दिया जोर
JLKM की राजनीतिक सक्रियता मुख्य रूप से झारखंड के कई मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में देखने को मिली है. आइसा सिंह किन्नर ने पलामू प्रमंडल में पार्टी की विचारधारा और संगठन को आगे बढ़ाने के लिए काम किया.मेदिनीनगर, गढ़वा और लातेहार जैसे क्षेत्रों में उनकी सक्रियता से पार्टी को स्थानीय स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर मिला. उनकी आक्रामक और बेबाक राजनीतिक शैली भी चर्चा में रही. इसके अलावा, JPSC और JSSC से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के समर्थन में उनकी भागीदारी ने उन्हें युवाओं के बीच पहचान दिलाई. संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें केंद्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
इस्तीफे की वजह क्या बताई?
आइसा सिंह किन्नर के मुताबिक, पार्टी के भीतर कुछ स्थानीय और क्षेत्रीय नेताओं की कार्यशैली तथा गुटबाजी से वह असंतुष्ट थीं. उनका आरोप है कि संगठन में कुछ लोगों के व्यवहार से उन्हें परेशानी हुई और उन्हें अपेक्षित सम्मान भी नहीं मिला. उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार काम किया और पलामू में संगठन को मजबूत करने की कोशिश की. इसके बावजूद उन्हें लगा कि उनके योगदान को उचित महत्व नहीं दिया जा रहा है.
आइसा सिंह ने अपने और पार्टी प्रमुख जयराम महतो के संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर फैलाई गई अफवाहों से भी आहत होने की बात कही. उनके अनुसार, जयराम महतो उनके राजनीतिक मार्गदर्शक रहे हैं. हालांकि, पार्टी के भीतर गुटबाजी, नेताओं की कार्यशैली और कथित अफवाहों को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इस मामले में संबंधित नेताओं और पार्टी नेतृत्व का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा.
JLKM के लिए क्या है इस इस्तीफे के मायने?
आइसा सिंह किन्नर का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब झारखंड में विभिन्न राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं. पलामू प्रमंडल में उनकी सक्रियता को देखते हुए उनके पार्टी छोड़ने से JLKM के स्थानीय संगठन पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इस घटनाक्रम का वास्तविक राजनीतिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आइसा सिंह आगे क्या कदम उठाती हैं और पार्टी नेतृत्व इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देता है.
फिलहाल, उनके इस्तीफे ने JLKM के भीतर संगठनात्मक समन्वय, नेताओं के बीच आपसी संबंध और क्षेत्रीय स्तर पर पार्टी की रणनीति को लेकर सवाल खड़े किए हैं. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस स्थिति से कैसे निपटती है और पलामू में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाती है.
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