RANCHI : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़ी परीक्षाओं में कथित धांधली और सेटिंग के मामले में जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं. जांच से जुड़े विवरणों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण के मुताबिक, आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांग्ते, परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और अन्य आरोपियों के बीच बड़ी संख्या में फोन कॉल हुए थे. जांच में इंटरव्यू के दौरान कथित तौर पर कोडिंग-डिकोडिंग के जरिए अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप भी सामने आया है.
एल ख्यांग्ते और धर्मेंद्र के बीच सैकड़ों कॉल
जांच में सामने आए कॉल डिटेल रिकॉर्ड के मुताबिक, तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल ख्यांग्ते और धर्मेंद्र के बीच अलग-अलग मोबाइल नंबरों पर कुल 340 संपर्क दर्ज होने की बात कही गई है. वहीं, परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के साथ 304 संपर्क दर्ज किए गए. जांच के विवरण में अन्य आरोपियों और आयोग से जुड़े कर्मचारियों के साथ भी फोन पर संपर्क की जानकारी दी गई है. हालांकि, केवल फोन कॉल की संख्या से किसी व्यक्ति की अपराध में संलिप्तता साबित नहीं होती. इन संपर्कों की प्रकृति और मामले में उनकी भूमिका का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा.
किसके साथ कितनी बार हुआ संपर्क?
जांच से जुड़े उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अलग-अलग मोबाइल नंबरों और निर्धारित अवधि में निम्नलिखित संपर्क दर्ज किए गए हैं.
- धर्मेंद्र (7004078438): 11 अगस्त 2024 से 10 जुलाई 2026 के बीच 267 संपर्क.
- धर्मेंद्र (9471527447): 13 अगस्त 2024 से 25 नवंबर 2025 के बीच 8 संपर्क.
- धर्मेंद्र (7004078438): 13 अगस्त 2024 से 10 जुलाई 2026 के बीच 65 संपर्क.
- श्वेता गुप्ता: 7 जून 2025 से 17 जुलाई 2026 के बीच 304 संपर्क.
- सोनू कुमार, JPSC सहायक और अभियुक्त: 10 मई 2025 से 9 जुलाई 2026 के बीच 139 संपर्क.
- अभय तिवारी: 29 अगस्त 2025 से 18 जनवरी 2026 के बीच 12 संपर्क.
- उमेश कुमार: 17 अप्रैल 2025 से 12 अगस्त 2025 के बीच 2 संपर्क.
- रामवीर सिंह से संबंधित बताए गए नंबर: 9 जून 2026 को 1 संपर्क.
इंटरव्यू से पहले कोडिंग-डिकोडिंग का आरोप
CID के मुताबिक, इंटरव्यू प्रक्रिया में कथित धांधली के लिए कोडिंग-डिकोडिंग का इस्तेमाल किया जाता था. आरोप है कि दलालों के माध्यम से प्राप्त अभ्यर्थियों के रोल नंबर और कोड की सूची TDPL के निदेशक के जरिए आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष तक पहुंचाई जाती थी. जांच में आरोप लगाया गया है कि अध्यक्ष परीक्षा से ठीक एक दिन पहले इन कोड को डिकोड करवाते थे और अपने या आयोग के किसी सदस्य के माध्यम से संबंधित जानकारी आगे पहुंचाई जाती थी. इससे कथित तौर पर सेटिंग करने वाले अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिल सकता था. इन आरोपों की पुष्टि के लिए जांच एजेंसियों की ओर से जुटाए गए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का महत्व अहम होगा.
OMR शीट की कार्बन कॉपी और स्कैनिंग पर भी सवाल
जांच के विवरण में OMR शीट से जुड़ी कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख है. आरोप है कि अभय कुमार की कंपनी द्वारा संचालित JET परीक्षा में धर्मेंद्र कुमार ने 36 अभ्यर्थियों की OMR शीट की कार्बन प्रतियां पैसे लेकर अरुण को दी थीं. इसके अलावा, OMR स्कैनिंग के दौरान शीट को लगभग दो महीने तक एजेंसी के पास रखे जाने की बात भी सामने आई है. जांच में इसे OMR शीट की सुरक्षित अभिरक्षा और निर्धारित प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर सवाल माना गया है.
स्ट्रांग रूम की सुरक्षा और CCTV पर भी सवाल
जांच में स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था और OMR शीट तथा उत्तर पुस्तिकाओं की अभिरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. आरोप है कि यह व्यवस्था परीक्षा नियंत्रक और अध्यक्ष के निर्देशन में थी, जबकि कुछ समय पर CCTV कैमरे बंद रखे जाते थे. यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, अभ्यर्थियों के चयन और आयोग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं. फिलहाल, मामले में सामने आए कॉल रिकॉर्ड और कथित कोडिंग-डिकोडिंग की भूमिका जांच के अहम पहलू हैं. आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही होगी.
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