RANCHI : झारखंड की राजनीति और आंदोलन के इतिहास से जुड़ा एक भावुक अध्याय आज अंतिम विदाई का गवाह बना. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन का पार्थिव शरीर रांची स्थित गुरुजी आवास से उनके पैतृक गांव नेमरा के लिए रवाना हो गया है. रूपी सोरेन के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार के लिए नेमरा में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है. उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा.
झारखंड आंदोलन की रहीं गवाह
रूपी सोरेन ने झारखंड आंदोलन के लंबे दौर को बेहद करीब से देखा था. वह उस समय की गवाह रहीं, जब अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन अपने निर्णायक दौर में था. शिबू सोरेन के साथ उन्होंने परिवार और आंदोलन के उतार-चढ़ाव को करीब से देखा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के राजनीतिक सफर के दौरान भी रूपी सोरेन परिवार के लिए एक मजबूत आधार के रूप में मौजूद रहीं.
रूपी सोरेन के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी समेत देश और झारखंड के कई प्रमुख नेताओं ने शोक जताया है. नेताओं ने उनके निधन को परिवार और समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया है.
नेमरा में अंतिम विदाई की तैयारी
रांची से पार्थिव शरीर के नेमरा पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में लोगों के अंतिम दर्शन के लिए जुटने की उम्मीद है. प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर तैयारियां की गई हैं. रूपी सोरेन के निधन के साथ सोरेन परिवार ने अपनी एक अहम सदस्य को खो दिया है. वहीं, झारखंड के लिए यह उस पीढ़ी की एक महत्वपूर्ण कड़ी के विदा होने का क्षण है, जिसने राज्य आंदोलन के दौर को बेहद करीब से देखा था. आज नेमरा सिर्फ एक मां को अंतिम विदाई नहीं देगा, बल्कि झारखंड आंदोलन के एक दौर की साक्षी रही रूपी सोरेन को भी आखिरी नमन करेगा.
