Ranchi : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 में हिस्सा ले रहे हैं. सरकार का कहना है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से राज्य में निवेश आकर्षित करने, औद्योगिक विकास को गति देने और झारखंड को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं.

लेकिन मुख्यमंत्री के इस दौरे के बीच डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता टाइगर जयराम महतो ने सरकार की निवेश नीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी विस्तृत टिप्पणी में उन्होंने पूछा है कि क्या झारखंड के विकास के लिए बार-बार दिल्ली और विदेशों के निवेश दौरों की आवश्यकता है, या राज्य की सबसे बड़ी जरूरत भ्रष्टाचार मुक्त और जवाबदेह शासन व्यवस्था है.
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दिल्ली में निवेशकों से संवाद, सरकार का बड़ा लक्ष्य
8 और 9 जुलाई को आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 में झारखंड सरकार देश-विदेश के उद्योगपतियों, निवेशकों, तकनीकी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ विभिन्न क्षेत्रों में संभावनाओं पर चर्चा कर रही है.
सरकार के अनुसार इस कार्यक्रम में औद्योगिक निवेश, डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सूचना प्रौद्योगिकी (IT), डिजिटल अवसंरचना, पर्यटन और नवाचार जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है. सरकार का दावा है कि यह पहल राज्य के “विजन-2050” को आगे बढ़ाने और झारखंड को निवेश के लिए पसंदीदा राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
टाइगर जयराम महतो का सवाल— संसाधन संपन्न राज्य फिर भी विकास पीछे क्यों?
मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के दौरान टाइगर जयराम महतो ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखकर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए.
उन्होंने लिखा कि जिस राज्य के पास देश के लगभग 40 प्रतिशत खनिज संसाधन मौजूद हों, वहां विकास की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है. उनका कहना है कि झारखंड को विकास के लिए बड़े-बड़े निवेश सम्मेलन या विदेश यात्राओं से अधिक आवश्यकता भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और पारदर्शी शासन की है.
जयराम महतो का दावा है कि यदि सरकारी व्यवस्था पारदर्शी और जवाबदेह हो जाए, तो निवेशकों का भरोसा अपने आप बढ़ेगा और उन्हें राज्य में लाने के लिए बार-बार बड़े आयोजनों की जरूरत नहीं पड़ेगी.
दावोस और ब्रिटेन दौरे का भी किया उल्लेख
जयराम महतो ने अपनी टिप्पणी में जनवरी 2026 में राज्य सरकार के उस विदेशी दौरे का भी उल्लेख किया, जिसमें सरकारी प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के दावोस और यूनाइटेड किंगडम गया था.
उन्होंने कहा कि उस समय भी सरकार ने बड़े निवेश, नए उद्योग और रोजगार सृजन के दावे किए थे.
उन्होंने सवाल उठाया—
- उस दौरे के बाद वास्तव में कितना निवेश जमीन पर उतरा ?
- कितने नए उद्योग स्थापित हुए ?
- कितने युवाओं को रोजगार मिला ?
- और सरकार जनता के सामने इन दावों का तथ्यात्मक विवरण कब रखेगी ?
उनका कहना है कि सरकार को इन सभी सवालों का स्पष्ट उत्तर देना चाहिए.
“उड़ता हाथी” प्रकरण का भी किया जिक्र
टाइगर जयराम महतो ने अपनी पोस्ट में पहले चर्चित रह चुके “उड़ता हाथी” प्रकरण का भी उल्लेख किया.
उनका कहना है कि राज्य में कई बार बड़ी-बड़ी घोषणाएं और दावे किए जाते हैं, लेकिन बाद में उनकी प्रगति और जवाबदेही पर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आती. उन्होंने कहा कि केवल आकर्षक प्रस्तुतियां और घोषणाएं विकास की गारंटी नहीं होतीं.
अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
जयराम महतो ने कहा कि राज्य के कुछ अधिकारी केवल योजनाओं की प्रस्तुति देने और बड़े कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित दिखाई देते हैं.
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक विभाग के अधिकारियों के लिए स्पष्ट लक्ष्य, समय-सीमा और कार्य मूल्यांकन की व्यवस्था होनी चाहिए. उनके अनुसार जब तक अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक निवेश संबंधी कार्यक्रमों का वास्तविक लाभ जनता तक नहीं पहुंचेगा.
उन्होंने कहा कि निवेश केवल सम्मेलन आयोजित करने से नहीं आता, बल्कि निवेशकों का भरोसा जीतने से आता है.
अधिकारियों की सोशल मीडिया मौजूदगी पर भी सवाल
जयराम महतो ने मुख्यमंत्री से यह भी आग्रह किया कि सभी विभागों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों को सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व ट्विटर) पर सक्रिय रहने का निर्देश दिया जाए.
उनका कहना है कि राज्य के कई महत्वपूर्ण विभागों और संस्थानों के प्रमुख अधिकारियों की आधिकारिक डिजिटल मौजूदगी तक नहीं है.
उन्होंने उदाहरण देते हुए स्वास्थ्य विभाग, रिम्स, सदर अस्पताल, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) जैसे पदों का उल्लेख किया और कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही का संदेश देना चाहती है, तो डिजिटल माध्यमों पर भी उसकी सक्रिय उपस्थिति दिखाई देनी चाहिए.
सरकार का पक्ष
दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि दिल्ली में आयोजित यह कार्यक्रम झारखंड के लिए महत्वपूर्ण अवसर है.सरकार के अनुसार इस मंच पर देश-विदेश की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों, निवेशकों और नीति निर्माताओं के साथ औद्योगिक विकास, डिजिटल गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है. सरकार का उद्देश्य आने वाले वर्षों में झारखंड को निवेश, उद्योग और रोजगार का प्रमुख केंद्र बनाना है.
अब सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल सामने खड़े हो रहे हैं.क्या केवल निवेश सम्मेलन आयोजित करने से उद्योग स्थापित हो जाएंगे ? क्या विदेशी और राष्ट्रीय निवेशक केवल प्रस्तुतियों से प्रभावित होंगे, या उन्हें सबसे पहले पारदर्शी प्रशासन, तेज निर्णय प्रक्रिया और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था चाहिए ? क्या दावोस से लेकर दिल्ली तक हुए निवेश अभियानों के ठोस परिणाम सरकार जनता के सामने रखेगी ? और क्या टाइगर जयराम महतो द्वारा उठाए गए सवालों का सरकार तथ्यात्मक जवाब देगी ?
फिलहाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दिल्ली में निवेशकों के साथ संवाद कर रहे हैं और सरकार इसे झारखंड के आर्थिक भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बता रही है. वहीं टाइगर जयराम महतो का कहना है कि राज्य के विकास की बुनियाद निवेश सम्मेलन नहीं, बल्कि ईमानदार, पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था होनी चाहिए. अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली का यह निवेश अभियान केवल एक और निवेश सम्मेलन बनकर रह जाता है या वास्तव में झारखंड में नए उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसरों का मार्ग प्रशस्त करता है.
