रांची: झारखंड कैडर की वर्ष 2000 बैच की आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल एक बार फिर चर्चा में हैं. कभी देश की सबसे कम उम्र की आईएएस अधिकारियों में शामिल रहीं पूजा सिंघल अब सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एवं ई-गवर्नेंस विभाग की सचिव के रूप में कार्यरत हैं. उनकी इस नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है.

विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं. वहीं सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
21 वर्ष की उम्र में बनी थीं आईएएस
पूजा सिंघल ने महज 21 वर्ष की आयु में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में अखिल भारतीय 10वीं रैंक प्राप्त की थी. इसके बाद वह झारखंड कैडर की आईएएस अधिकारी बनीं. शुरुआती वर्षों में उन्हें तेज-तर्रार और प्रतिभाशाली अधिकारियों में गिना जाता था. हालांकि, उनका प्रशासनिक सफर बाद में गंभीर विवादों के कारण सुर्खियों में आ गया.
What a strong job security
> She is Pooja Singhal, IAS 2000 Batch, Jharkhand
> She secured All India Rank 10 and became youngest IAS of India at the age of 21
> Arrested by ED in allegedly MGNREGA and Mining lease scam in 2022
> 36 crore cash and 82 crore worth immovable… pic.twitter.com/aOMbbQ14dE
— Gems Of Naukarshahi (@NaukarshahiGems) July 8, 2026
मनरेगा और खनन पट्टा मामले में हुई थी ईडी की कार्रवाई
वर्ष 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित मनरेगा और खनन पट्टा (माइनिंग लीज) से जुड़े धनशोधन मामले में पूजा सिंघल को गिरफ्तार किया था. ईडी ने उस समय दावा किया था कि जांच के दौरान लगभग 36 करोड़ रुपये नकद और करीब 82 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए थे. एजेंसी ने इन मामलों को धनशोधन से जोड़ते हुए कार्रवाई की थी. इन आरोपों की जांच अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और मामले में अंतिम निर्णय आना शेष है.
जेल, जमानत और फिर सेवा में वापसी
गिरफ्तारी के बाद पूजा सिंघल लगभग दो वर्ष चार महीने तक न्यायिक हिरासत में रहीं। वर्ष 2024 में उन्हें अदालत से जमानत मिली. जमानत मिलने के बाद उनकी सरकारी सेवा बहाल हुई. वर्तमान में वह झारखंड सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग की सचिव हैं. इसके साथ ही उन्हें झारखंड कम्युनिकेशन नेटवर्क लिमिटेड (JCNL) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है.
नियुक्ति को लेकर उठे सवाल
पूजा सिंघल की मौजूदा नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. कई उपयोगकर्ता इसे लेकर अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं. कुछ लोगों ने सरकारी सेवा नियमों और नौकरी की सुरक्षा को लेकर टिप्पणी की, जबकि अन्य लोगों ने कहा कि किसी भी अधिकारी के मामले में अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक कानूनी प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए.
बाबूलाल मरांडी ने क्या कहा ?
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ पूजा सिंघल और अधिकारी राजीव बक्शी की मौजूदगी वाली तस्वीर साझा करते हुए सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने लिखा कि जिस मामले को कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का प्रतीक बताया गया था, उसी मामले से जुड़ी अधिकारी की सत्ता के मंच पर मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है.
“संगत से गुण आत है, संगत से गुण जात।”
जिस पूजा सिंघल के मामले को कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का प्रतीक बताया गया, आज वही सत्ता के मंच पर दिखाई दें, तो सवाल उठना लाज़िमी है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ पूजा सिंघल और राजीव बक्शी की मौजूदगी क्या संदेश देती है? क्या… pic.twitter.com/sLKRjLvn3K
— Babulal Marandi (@yourBabulal) July 3, 2026
मरांडी ने पूछा कि क्या यह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का वही संदेश है, जिसकी बात पहले की जाती थी, या फिर सरकार का रुख बदल चुका है.उन्होंने यह भी लिखा कि दिल्ली में आयोजित स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के बीच यह तस्वीर जनता के सामने अलग संदेश देती है और लोग केवल तस्वीरें ही नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक अर्थ भी समझते हैं.
सरकार की ओर से क्या कहा गया?
इस पूरे विवाद पर सरकार की ओर से पूजा सिंघल की नियुक्ति या बाबूलाल मरांडी की टिप्पणी को लेकर तत्काल कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि, सेवा नियमों के अनुसार किसी सरकारी अधिकारी की नियुक्ति, पदस्थापना और सेवा से जुड़े निर्णय निर्धारित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत लिए जाते हैं. वहीं किसी आपराधिक मामले में अंतिम दोष सिद्ध होने या बरी होने का निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाता है.
अब सबसे बड़ा सवाल
पूजा सिंघल की वर्तमान नियुक्ति ने एक बार फिर कई प्रश्नों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. क्या गंभीर आरोपों का सामना कर रहे किसी अधिकारी की महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर वापसी जनता के बीच सही संदेश देती है?
क्या केवल जमानत मिलने के बाद ऐसी नियुक्तियां प्रशासनिक नियमों के अनुरूप सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं ? मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, तब राजनीतिक आरोपों और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए?इन सवालों के जवाब आने वाले समय में राजनीतिक बहस और न्यायिक प्रक्रिया, दोनों के माध्यम से सामने आएंगे.
