रांची : झारखंड सरकार के वित्त विभाग की कार्यशैली को लेकर राज्य सरकार के भीतर ही असंतोष सामने आया है. वित्त विभाग पर योजनाओं से जुड़ी फाइलों में देरी और अनावश्यक आपत्तियां लगाने के आरोप लगे हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कैबिनेट की बैठक में तीन मंत्रियों ने इस मुद्दे पर नाराज़गी भी जताई.

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा अपनी सुरक्षा वापस किए जाने के बाद एक नया विवाद सामने आया है. मंत्री के अनुसार, सुरक्षा वाहन लौटाने का कोई आदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी नहीं किया गया था.सुरक्षा वापस करने के बाद पुलिस मुख्यालय से डीएसपी जय प्रकाश नाग, डीएसपी (स्पेशल ब्रांच) सुमन कुमार और सार्जेंट मेजर सुशांत ने वित्त मंत्री से मुलाकात की.अधिकारियों ने उन्हें बताया कि पुलिस मुख्यालय की ओर से वाहन लौटाने का कोई निर्देश जारी नहीं हुआ था.
इसके बाद वित्त मंत्री ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस मुख्यालय ने कोई आदेश जारी नहीं किया, तो वित्त विभाग के संयुक्त सचिव की ओर से वाहन लौटाने का पत्र किस आधार पर जारी किया गया.
कैबिनेट बैठक में मंत्रियों ने जताई नाराज़गी
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, इरफान अंसारी और दीपिका पांडेय सिंह ने वित्त विभाग की कार्यप्रणाली पर आपत्ति दर्ज कराई.
मंत्रियों का कहना था कि वित्त विभाग में कई फाइलें महीनों तक लंबित रखी जाती हैं. उनका आरोप है कि अधिकारी अनावश्यक जानकारी मांगकर फाइलों के निस्तारण में देरी करते हैं, जिससे विभिन्न विभागों की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं.
उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन उसके नाम पर विकास कार्यों को रोकना उचित नहीं है. समय पर धनराशि उपलब्ध नहीं होने से कई परियोजनाओं की गति प्रभावित हो रही है.
रिम्स-2 परियोजना पर वित्त विभाग ने मांगी अतिरिक्त जानकारी
राज्य सरकार ने रिम्स-2 के निर्माण के लिए 4,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को मंजूरी दी है. यह प्रस्ताव वित्त विभाग के पास पहुंचने के बाद विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल के लिए मानव संसाधन की विस्तृत कार्ययोजना मांगी.
वित्त विभाग ने पूछा कि प्रस्तावित अस्पताल में डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति किस प्रकार की जाएगी. इसके अलावा परियोजना से जुड़े आठ से नौ अन्य बिंदुओं पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है.
नगर विकास विभाग की कई योजनाएं लंबित
वित्त विभाग में लंबित परियोजनाओं में नगर विकास विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं.
इनमें आदित्यपुर, मानगो, जमशेदपुर, जुगसलाई और कपाली में 74.64 करोड़ रुपये की सीवरेज एवं वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना शामिल है। इसके अलावा चास में 21.27 करोड़ रुपये की सीवरेज परियोजना तथा दुमका, लोहरदगा, मधुपुर, मेदिनीनगर और सिमडेगा में लीगेसी वेस्ट मैनेजमेंट परियोजनाएं भी लंबित बताई जा रही हैं.
इसके साथ ही 27 नगर निकायों में यूज्ड वाटर मैनेजमेंट परियोजना और सात नगर निकायों में 29.38 करोड़ रुपये की लागत से 35 पार्कों के निर्माण का प्रस्ताव भी वित्त विभाग में लंबित है.
ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं पर भी असर
ग्रामीण विकास विभाग की कई योजनाएं भी वित्तीय स्वीकृति का इंतजार कर रही हैं।
इनमें अबुआ आवास योजना के अधूरे आवासों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता बताई गई है. वहीं, 79.15 करोड़ रुपये की जल छाजन योजना चालू वित्तीय वर्ष में स्वीकृत होने के बावजूद शुरू नहीं हो सकी है.
इसके अलावा 28 करोड़ रुपये की लागत वाली सड़कों के निर्माण संबंधी प्रस्ताव तथा 10 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित अंबेडकर आवास योजना भी धनराशि के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रही है.
वित्त मंत्री बोले- हर फाइल मेरे पास नहीं आती
पूरे विवाद पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वित्त विभाग की सभी फाइलें उनके स्तर तक नहीं पहुंचतीं। कई मामलों का निस्तारण अधिकारी स्तर पर ही कर दिया जाता है.
उन्होंने कहा कि जो फाइलें उनके पास आती हैं, उनका यथासंभव शीघ्र निपटारा किया जाता है और विभागीय मंत्रियों के साथ उनका लगातार संवाद भी बना रहता है.
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि अधिकारी वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों से अतिरिक्त जानकारी मांगते होंगे, लेकिन सभी मामलों में समय-सीमा का पालन किया जाना आवश्यक है.
