रांची : झारखंड की राजधानी रांची के एक निजी अस्पताल में 18 वर्षीय युवक की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया है. मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने और 22 लाख रुपये का बिल थमाने का आरोप लगाया है। मामले ने तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसकी जांच के निर्देश दिए हैं.
.@DC_Ranchi तत्काल संज्ञान ले मामले की पूरी जांच करें। दोषी पाए जाने पर सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए सूचना दें। https://t.co/MdtZ1Vil9M
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) July 4, 2026
सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल में कराया गया था भर्ती
जानकारी के अनुसार, लातेहार निवासी 18 वर्षीय राजू कुमार रंजन 24 मई को एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था. इसके बाद उसे इलाज के लिए रांची के राज अस्पताल में भर्ती कराया गया.परिजनों का आरोप है कि युवक के पैर में गंभीर चोट थी, लेकिन शुरुआती दिनों में घाव की समुचित ड्रेसिंग और उपचार नहीं किया गया.उनका कहना है कि इसी कारण संक्रमण बढ़ता गया और बाद में उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई.
आईसीयू में इलाज के दौरान हुई मौत
परिजनों के अनुसार, हालत गंभीर होने पर युवक को अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया. हालांकि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. मृत्यु के बाद अस्पताल की ओर से परिजनों को 22 लाख रुपये का बिल सौंपा गया. इसके बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया और इलाज में लापरवाही के साथ-साथ मनमाने तरीके से बिल वसूलने का आरोप लगाया.
पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेजा गया शव
मामले की गंभीरता को देखते हुए युवक के शव का पोस्टमार्टम रिम्स में कराया गया है. प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारणों का पता लगाने में मदद मिलेगी.
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के निर्देश
घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश दिया है.इसके बाद उपायुक्त ने रांची के सिविल सर्जन के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की है। यह टीम अस्पताल में हुए इलाज, मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार की प्रक्रिया और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी.
जांच रिपोर्ट के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल मामले की जांच जारी है. जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि युवक की मौत इलाज में कथित लापरवाही के कारण हुई या नहीं. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि अस्पताल द्वारा जारी किया गया 22 लाख रुपये का बिल निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप था या नहीं. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
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