रांची : झारखंड में रविवार, 28 जून से तीन दिवसीय राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान शुरू हो गया. यह अभियान 30 जून तक चलेगा. राज्य सरकार ने इस दौरान पाँच वर्ष से कम आयु के 61.26 लाख से अधिक बच्चों को पोलियो रोधी दवा (ओरल पोलियो वैक्सीन-ओपीवी) की ‘दो बूंद जिंदगी की’ पिलाने का लक्ष्य रखा है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अभियान के पहले दिन राज्यभर में बनाए गए हजारों पोलियो बूथों पर बच्चों को दवा पिलाई जा रही है. इसके बाद दूसरे और तीसरे दिन स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की खुराक देंगे, जो पहले दिन बूथ तक नहीं पहुँच पाए.

अभियान के तहत बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी विशेष ट्रांजिट बूथ स्थापित किए गए हैं, ताकि यात्रा के दौरान भी कोई बच्चा पोलियो की दवा लेने से वंचित न रह जाए.
अभियान के लिए व्यापक तैयारियाँ
स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को सफल बनाने के लिए बड़ी संख्या में एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविकाएँ, सहिया और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की है. इसके अलावा सभी जिलों में निगरानी दल भी बनाए गए हैं, जो अभियान की प्रगति पर लगातार नज़र रखेंगे.
अभिभावकों से अपील
स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे पाँच वर्ष से कम आयु के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दवा अवश्य पिलाएँ. विभाग का कहना है कि यदि किसी बच्चे को हल्का बुखार, सर्दी या खाँसी भी हो, तब भी उसे पोलियो की खुराक दी जा सकती है.
पोलियो मुक्त स्थिति बनाए रखना चुनौती
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को पोलियो मुक्त घोषित किए जाने के बावजूद कुछ पड़ोसी देशों में अब भी पोलियो के मामले सामने आते हैं. ऐसे में नियमित टीकाकरण और पल्स पोलियो अभियान के माध्यम से बच्चों को समय-समय पर पोलियो की खुराक देना आवश्यक है, ताकि देश की पोलियो मुक्त स्थिति बनी रहे.
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और अपने आसपास के सभी पात्र बच्चों को पोलियो की दवा दिलाने की अपील की है. विभाग का लक्ष्य है कि अभियान के दौरान राज्य का कोई भी पात्र बच्चा पोलियो रोधी खुराक से वंचित न रहे.
