RANCHI : नेपाल जाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए यात्रा नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है. अब नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय यात्रियों को यह बताना होगा कि वे किस सीमा चौकी या मार्ग से नेपाल में प्रवेश कर रहे हैं और किस निर्धारित एग्जिट प्वाइंट से वापस लौटेंगे। नेपाल सरकार ने सीमा प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने, यात्रियों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नई व्यवस्था के तहत सीमा पार करने वाले यात्रियों का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित तरीके से रखा जाएगा और उनके आवागमन पर नजर रखी जाएगी.

सीमा पार यात्रा पर बढ़ेगी निगरानी
भारत और नेपाल के बीच 1950 की मैत्री संधि के तहत दोनों देशों के नागरिकों को बिना वीजा यात्रा की सुविधा प्राप्त है. भारतीय नागरिक आज भी नेपाल जाने के लिए वीजा के मोहताज नहीं हैं और वैध भारतीय पहचान पत्र या पासपोर्ट के आधार पर नेपाल में प्रवेश कर सकते हैं. हालांकि नई व्यवस्था के लागू होने के बाद यात्रियों को यात्रा के दौरान अपने प्रवेश और निकास मार्ग की स्पष्ट जानकारी देनी होगी. नेपाल सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. साथ ही पर्यटन और तीर्थयात्रा के उद्देश्य से नेपाल आने वाले लोगों का डेटा भी अधिक सटीक तरीके से उपलब्ध हो सकेगा.
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अधिकारियों का कहना है कि इससे सीमा प्रबंधन को आधुनिक और प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी. इस बदलाव का असर खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से सड़क मार्ग के जरिए नेपाल जाने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है. हालांकि नेपाल सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है.
