रांची /नई दिल्ली : झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक शिबू सोरेन को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उनकी ओर से उनकी पुत्रवधू रूपी सोरेन ने सम्मान ग्रहण किया.
शिबू सोरेन, जिन्हें झारखंड में ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाना जाता है, लंबे समय से आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर चले आंदोलनों का प्रमुख चेहरा रहे हैं. पद्म भूषण सम्मान को उनके दशकों लंबे सामाजिक और राजनीतिक योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के रूप में देखा जा रहा है.

कौन हैं दिशोम गुरु शिबू सोरेन ?
शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन झारखंड आंदोलन से जुड़ा रहा है. उन्होंने उस दौर में आदिवासियों, किसानों और वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई, जब झारखंड अलग राज्य नहीं था.
महाजनी प्रथा, जमीन पर कब्जे और आदिवासी शोषण के खिलाफ उनके आंदोलनों ने उन्हें झारखंड के गांव-गांव तक पहचान दिलाई. बाद में वे झारखंड आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए.
वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के गठन के पीछे जिन नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है, उनमें शिबू सोरेन का नाम प्रमुखता से लिया जाता है.
तीन बार बने झारखंड के मुख्यमंत्री
शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे. इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार में कोयला मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली.
राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन झारखंड की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बना रहा. समर्थक उन्हें आदिवासी अस्मिता और झारखंडी पहचान की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा मानते हैं.
रूपी सोरेन ने ग्रहण किया सम्मान
राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में शिबू सोरेन की ओर से उनकी पुत्रवधू रूपी सोरेन ने पद्म भूषण सम्मान ग्रहण किया.
समारोह के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा और उनके समर्थकों ने इसे पूरे राज्य के लिए सम्मान बताया. पार्टी नेताओं का कहना है कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन और उससे जुड़े लाखों लोगों के संघर्ष का सम्मान है.
झामुमो ने जताई खुशी
झामुमो नेताओं ने पद्म भूषण सम्मान को ऐतिहासिक बताया है. पार्टी का कहना है कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन आदिवासियों, गरीबों और वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए समर्पित किया.
राज्यसभा सांसद महुआ माजी सहित कई नेताओं ने कहा कि शिबू सोरेन का योगदान केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने देशभर में आदिवासी समाज की आवाज को मजबूत करने का काम किया है.
भारत रत्न की मांग भी उठी
पद्म भूषण सम्मान मिलने के बाद एक बार फिर शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग भी उठी है. झामुमो के कई नेताओं का कहना है कि झारखंड राज्य निर्माण और आदिवासी अधिकारों के लिए उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया जाना चाहिए.
हालांकि फिलहाल पद्म भूषण सम्मान को लेकर झारखंड में उत्साह का माहौल है और इसे राज्य के राजनीतिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में देखा जा रहा है.
क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मान?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पद्म भूषण सम्मान केवल शिबू सोरेन के राजनीतिक जीवन की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह झारखंड आंदोलन, आदिवासी पहचान और क्षेत्रीय आकांक्षाओं की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति का भी प्रतीक है.
इसी वजह से यह सम्मान झारखंड की राजनीति और समाज दोनों के लिए विशेष महत्व रखता है.
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