RANCHI : अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल देखने को मिला है. सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब चार फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल. डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है.

अब सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस ?
दरअसल. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ था. इससे वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला था. लेकिन अब युद्धविराम और इस समुद्री मार्ग को फिर से खोलने पर सहमति बनने के बाद तेल बाजार में स्थिरता लौटने लगी है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार. ब्रेंट क्रूड की कीमतें चार फीसदी तक लुढ़क गई हैं और मार्च के बाद के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्धविराम लंबे समय तक कायम रहता है और तेल आपूर्ति सामान्य होती है. तो आने वाले हफ्तों में ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम हो सकता है.
हालांकि. भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम है. क्योंकि घरेलू ईंधन कीमतों की समीक्षा तेल विपणन कंपनियों की नीतियों और अन्य आर्थिक कारकों के आधार पर की जाती है. फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
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बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहती है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहता है. तो आम उपभोक्ताओं को भी आने वाले समय में राहत मिल सकती है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के सफल क्रियान्वयन पर टिकी हुई है.
स्रोत : रॉयटर्स. इकोनॉमिक टाइम्स और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स
