रांची : राजधानी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम परिसर में स्थित एक टावर पर चढ़े हीरालाल करीब आठ घंटे बाद सुरक्षित नीचे उतर आए. पुलिस और अन्य लोगों की लगातार समझाने और बातचीत के बाद उन्होंने टावर से नीचे आने का फैसला किया.नीचे उतरने के बाद हीरालाल सबसे पहले अपनी पत्नी और बच्चों से मिले. उन्होंने बच्चों को गोद में उठाया तो वह भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी भावुक माहौल बन गया.

टावर से नीचे आने के बाद हीरालाल ने मीडिया से बातचीत में अपने इस कदम के पीछे बेरोजगारी, पारिवारिक तनाव और सरकारी नीतियों से निराशा को वजह बताया.
लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था
हीरालाल ने कहा कि वह लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. उनके मुताबिक, नौकरी नहीं मिलने की वजह से उनके ऊपर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता गया. उन्होंने सरकारी भर्तियों में कथित अनियमितताओं का भी आरोप लगाया. उनका कहना था कि अगर भर्ती प्रक्रिया में योग्य उम्मीदवारों को उचित अवसर नहीं मिलता है, तो इसका असर युवाओं के भविष्य पर पड़ता है. हीरालाल ने कहा कि नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं में लगातार निराशा बढ़ रही है और सरकार को उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए.
पत्नी के तानों का भी किया जिक्र
हीरालाल ने बातचीत के दौरान अपने पारिवारिक जीवन से जुड़ी परेशानियों का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, उनकी पत्नी मेडिकल की दुकान चलाती हैं. उन्होंने दावा किया कि दोनों के बीच घरेलू विवाद होते रहते थे और उन्हें कई बार आर्थिक स्थिति को लेकर ताने सुनने पड़ते थे. हीरालाल का आरोप है कि उनकी पत्नी उनसे कहती थीं “तुम्हारी एक रुपया कमाने की भी औकात नहीं है “उन्होंने कहा कि इसी बात से आहत होकर उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रतीकात्मक तौर पर एक रुपये की मांग की थी.
हालांकि, पत्नी की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इसलिए इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है.
छात्रों के आंदोलन में भी रहे सक्रिय
हीरालाल ने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से छात्रों के आंदोलन में भी सक्रिय रूप से शामिल थे. उनका कहना था कि वह छात्रों की मांगों और बेरोजगार युवाओं से जुड़े मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों पर सरकार की ओर से अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया. उनका कहना था कि लंबे समय तक मांगों पर सुनवाई नहीं होने से युवाओं में नाराजगी और निराशा बढ़ती गई.
हीरालाल के मुताबिक, उनकी व्यक्तिगत परेशानियां और रोजगार से जुड़ी चिंताएं एक-दूसरे से जुड़ती चली गईं और इसी दबाव में उन्होंने टावर पर चढ़ने का कदम उठाया.
करीब आठ घंटे तक चला समझाने का दौर
हीरालाल के टावर पर चढ़ने की सूचना मिलने के बाद मौके पर पुलिस और अन्य लोग पहुंचे। उन्हें सुरक्षित नीचे उतारने के लिए लगातार बातचीत और समझाइश की गई. काफी देर तक चले प्रयास के बाद उन्होंने नीचे आने का निर्णय लिया. इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए थाना भेज दिया.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हीरालाल ने टावर पर चढ़ने का फैसला किन परिस्थितियों में लिया था और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या थे.
मामला सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी का है या बड़े सवाल का ?
हीरालाल के बयान ने एक बार फिर बेरोजगारी, सरकारी भर्ती प्रक्रिया और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं के बीच बढ़ती बेचैनी के सवाल को सामने ला दिया है. एक ओर वह अपने पारिवारिक तनाव की बात करते हैं, तो दूसरी ओर सरकारी नौकरी नहीं मिलने और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को अपनी निराशा की वजह बताते हैं.
हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम और उनके बयान के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है.
