Ranchi : झारखंड के दूर-दराज आदिवासी गांवों में इन दिनों एक अलग तरह की जागरूकता यात्रा चल रही है. गांव की चौपालों से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक, हर जगह अपनी परंपराओं और पहचान को बचाने की बातें हो रही हैं.
इस अभियान के केंद्र में हैं भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी निशा उरांव। वे गांव-गांव जाकर लोगों को आदिवासी संस्कृति की विशेषताओं, लोकगीतों और ऐतिहासिक विरासत के बारे में बता रही हैं.
उनका मानना है कि किसी भी समाज की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक पहचान होती है. इसी उद्देश्य से वे लोगों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दे रही हैं.

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सभा को संबोधित करते हुए निशा उरांव ने कहा कि समाज की मजबूती उसकी परंपराओं और आस्था में छिपी होती है. उन्होंने पेड़ और उसकी जड़ों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि जड़ों को सही पोषण मिले तो समाज मजबूत बना रहता है, लेकिन जड़ों को नुकसान पहुंचाने से उसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.
उन्होंने लोगों से अपनी संस्कृति और परंपराओं को संभालकर रखने की अपील करते हुए कहा कि जब कोई अपनी जड़ों से दूर जाता है, तो वह अपनी पहचान को कमजोर कर देता है.
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