Arafat
PAKUR : शहरकोल में संचालित प्रथम कोचिंग इंस्टिट्यूट में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में गानेर तोरी संगीत स्कूल के बच्चों ने रंगारंग प्रस्तुति दी. एक से बढ़कर एक नृत्य और संगीत से समां बांध दिया. अपनी प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया. यूं कहे कि गानेर तोरी संगीत स्कूल के बच्चों का अलग ही जलवा रहा. यह कार्यक्रम गानेर तोरी संगीत स्कूल की प्राचार्य डॉ. इप्सिता पांडेय के अनुरोध पर प्रस्तुत किया गया. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को मोबाइल और नशा के लत से छुटकारा दिलाना रहा. उन्हें संगीत और खेलकूद जैसी गतिविधियों में शामिल करना, ताकि नशा और मोबाइल की लत से छुटकारा दिलाकर एक नया बेहतरीन प्लेटफॉर्म दिलाया जा सके.
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इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में नगर परिषद अध्यक्ष शबरी पाल, समाजसेवी सोमनाथ पाल, आशु चौधरी शामिल हुए. प्राचार्य डॉ. इप्सिता पांडेय स्वयं कार्यक्रम में मौजूद रहीं. आयोजित कार्यक्रम में चार से चौदह साल के बच्चों ने हिस्सा लिया. इनमें ईनेश, पृथ्वी, अवर्णा, प्रिशा, सौमीता, अंकिता, श्रद्धा, मिठी, संचिता, डिंपल, जानवी, अंजना, श्रुति, सानु, परमानंद, जैक्सन, अंशुमान, पवन शामिल हैं. वहीं नृत्य शिक्षिका शर्मिष्ठा दास और तबला शिक्षक अर्पण घोष भी कार्यक्रम में शामिल हुए. कार्यक्रम में बच्चों ने एक से बढ़कर एक नृत्य और संगीत प्रस्तुती दी. जिससे अतिथि और सारे दर्शक झूम उठे. अतिथियों और दर्शकों ने तालियां बजाकर बच्चों की हौसला अफजाई की.

नगर परिषद अध्यक्ष शबरी पाल ने बच्चों की प्रतिभा की खूब तारीफ की. उन्होंने बच्चों को इस तरह का मंच प्रदान करने के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया. उन्होंने आगे भी इस तरह के कार्यक्रमों को आयोजित करने का आग्रह किया. इस अवसर पर गानेर तोरी संगीत स्कूल की प्राचार्य डॉ. इप्सिता पांडेय ने बच्चों को नशा और मोबाइल की लत से छुटकारा दिलाने के लिए माता-पिता को जागरूक होने की अपील की. उन्होंने कहा कि माता-पिता को आगे आकर बच्चों को ऐसे लत से छुटकारा दिलाना होगा. इसके लिए नृत्य, संगीत और खेलकूद का मंच सबसे ज्यादा कारगर साबित हो सकता है. इसमें जब बच्चों को सफलता मिलेगी, तो बच्चें खुद-ब-खुद प्रोत्साहित होंगे. इससे बच्चें और ज्यादा नृत्य संगीत और खेलकूद के करीब आने का प्रयास करेंगे. उन्होंने कहा कि नृत्य, संगीत और खेलकूद से भी बच्चों का भविष्य संवारा जा सकता है.
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डॉ. इप्सिता पांडेय ने कहा कि खासकर माताओं को सबसे ज्यादा जागरूक होना होगा. उन्होंने कहा कि बच्चों को सिर्फ स्कूल के भरोसे छोड़ना नहीं होगा, बल्कि स्किल कोर्स से जोड़ने की जरूरत है. डॉ. इप्सिता पांडेय ने कहा कि नशा और मोबाइल की लत से बच्चों को दूर रखने के लिए सबको आगे आना होगा. प्रशासन, मीडिया, सोशल मीडिया, समाज के बुद्धिजीवियों को साथ मिलकर काम करना होगा. उन्होंने दुर्गा पूजा के बाद तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित कराने की बात कही. जिसमें इस विषय पर खास तौर पर बात रखी जाएगी.
