RANCHI / GUMLA : झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और डिजिटल हेल्थ को बढ़ावा देने के दावों के बीच गुमला जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है. यहां घाघरा प्रखंड में एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकी. वहीं, सड़क की खराब स्थिति के कारण महिला को ‘दउरी’ में बैठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ा. इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जानकारी के अनुसार, घाघरा प्रखंड के एक ग्रामीण इलाके में गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी. लेकिन, गांव तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क और एम्बुलेंस की सुविधा नहीं होने के कारण परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. आखिरकार, महिला को ‘दउरी’ में बैठाकर मुख्य सड़क तक लाया गया, ताकि वहां से उसे अस्पताल पहुंचाया जा सके.
इसे भी पढ़े : 9 अक्टूबर को भारत-वेस्टइंडीज मुकाबला, टिकट से पार्किंग तक जान लें ये जरूरी बातें
डिजिटल हेल्थ के दावों के बीच जमीनी हकीकत पर सवाल
राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, डिजिटल हेल्थ को बढ़ावा देने और लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने की बात करती रही है. लेकिन, गुमला के घाघरा प्रखंड से सामने आई यह तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े करती है. खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में सड़क और एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव मां और बच्चे, दोनों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है.
डिजिटल हेल्थ के दावे फेल! गर्भवती महिला के लिए ‘दउरी’ बनी एम्बुलेंस #DigitalHealth #PregnancyCare #Ambulance #Jharkhand #HealthNews #RuralHealthcare #MaternalHealth #HealthcareCrisis #JharkhandNews #Loktantra19 pic.twitter.com/0OpTwP7rOW
— Loktantra19 (@theLoktantra19) October 4, 2026
स्वास्थ्य मंत्री से जवाबदेही की मांग
इस घटना के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों और उनकी जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है. राजधानी में बैठकर स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने की योजनाओं पर चर्चा करना एक बात है, लेकिन दूरदराज के गांवों में जरूरतमंद मरीजों तक समय पर चिकित्सा सुविधा पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है.
सवाल यह है कि जब किसी गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ‘दउरी’ का सहारा लेना पड़े, तो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति का आकलन कैसे किया जाए? क्या सरकार ऐसे गांवों तक बेहतर सड़क और एम्बुलेंस की सुविधा पहुंचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी?
गुमला की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता केवल घोषणाओं या आधुनिक तकनीक तक सीमित नहीं हो सकती. इसकी असली कसौटी यह है कि जरूरत के समय राज्य के दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों को कितनी आसानी से इलाज मिल पाता है.
