RANCHI : झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार सवाल सिर्फ कथित पेपर लीक को लेकर नहीं, बल्कि पूर्व DGP अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में हुई जांच और अब SIT की जांच के दावों को लेकर भी उठ रहे हैं. दरअसल, JSSC-CGL परीक्षा के दौरान 28 अभ्यर्थियों को नेपाल के बीरगंज ले जाने का मामला सामने आया था. आरोप है कि परीक्षा से पहले इन अभ्यर्थियों को सवालों के जवाब याद करवाए गए थे. हालांकि, उस समय इस पूरे मामले को पेपर लीक से जोड़कर नहीं देखा गया था. अब SIT की जांच में इसी मामले को लेकर कई गंभीर दावे सामने आने की बात कही जा रही है.
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SIT की जांच में पेपर लीक का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, SIT ने अपनी जांच में JSSC-CGL पेपर लीक होने की बात सामने आने का दावा किया है. जांच में कथित तौर पर यह बात सामने आई कि कुछ अभ्यर्थियों को पैसे लेकर परीक्षा से पहले एक जगह बुलाया गया और उन्हें प्रश्नों के उत्तर याद करवाए गए. इसके लिए करीब 20-20 लाख रुपये लिए जाने की बात भी जांच में सामने आने का दावा किया गया है. यही वजह है कि अब पूर्व DGP अनुराग गुप्ता के उस समय के बयान भी चर्चा में आ गए हैं.
पुराने बयान पर फिर उठे सवाल
मामले की शुरुआती जांच के दौरान पूर्व DGP अनुराग गुप्ता ने सवाल उठाया था कि अगर परीक्षा का पेपर लीक हुआ है, तो उसके ठोस सबूत कहां हैं? उन्होंने कथित तौर पर WhatsApp चैट, मोबाइल नंबर और दूसरे ठोस प्रमाण सामने आने की जरूरत पर सवाल उठाए थे. लेकिन अब SIT की जांच में आरोपियों के बयानों और कथित मनी ट्रेल के आधार पर पेपर लीक की बात सामने आने का दावा किया जा रहा है।यही इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू बन गया है.
100 से ज्यादा अभ्यर्थियों के नाम सामने आने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, SIT की जांच में 100 से ज्यादा ऐसे अभ्यर्थियों के नाम सामने आने की बात कही गई है, जिन्होंने कथित तौर पर पेपर लीक के जरिए परीक्षा पास की और बाद में सरकारी नौकरी हासिल की. वहीं, करीब 8 नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों के मनी ट्रेल मिलने का दावा भी किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इनके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है. जांच में मिथिलेश सिंह का नाम भी सामने आया है, जिसे कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ा अहम व्यक्ति बताया जा रहा है.
क्या है नेपाल के बीरगंज का कनेक्शन?
अब इस पूरे मामले में नेपाल के बीरगंज कनेक्शन की भी चर्चा हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, 28 अभ्यर्थियों को बीरगंज ले जाया गया था. वहां उन्हें करीब 135 सवालों के जवाब याद करवाए जाने का दावा है. बताया जा रहा है कि परीक्षा में इनमें से करीब 120 सवाल सही निकलने की बात सामने आई. इन 28 अभ्यर्थियों में से करीब 10 के परीक्षा पास करने का दावा भी रिपोर्ट में किया गया है. हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि SIT को अभी तक मूल प्रश्नपत्र बरामद नहीं होने की बात सामने आई है. ऐसे में पेपर लीक के आरोपों का अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा.
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं: अगर उस समय नेपाल ले जाए गए अभ्यर्थियों और परीक्षा से जुड़े तथ्यों की जानकारी सामने आ गई थी, तो उस वक्त जांच की दिशा क्या थी? अगर अब SIT की जांच में पेपर लीक और मनी ट्रेल के दावे सामने आ रहे हैं, तो क्या पहले की जांच में कोई महत्वपूर्ण पहलू छूट गया था? अगर पेपर लीक के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने की बात जांच में साबित होती है, तो क्या ऐसे अभ्यर्थियों की नौकरी पर भी कार्रवाई होगी? फिलहाल SIT की जांच जारी है. आने वाले दिनों में इस मामले में और नाम, दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं. JSSC-CGL विवाद अब सिर्फ कथित पेपर लीक का मामला नहीं रह गया है. यह जांच की दिशा, जिम्मेदारी तय करने और हजारों अभ्यर्थियों के भरोसे से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है.
