RANCHI : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के तीसरे दीक्षांत समारोह में छात्र नेता रवि को खोरठा विषय में शानदार प्रदर्शन के लिए गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जाएगा. विश्वविद्यालय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल करने वाले रवि को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के हाथों सम्मानित किया जाएगा. रवि की यह उपलब्धि इसलिए खास है, क्योंकि छात्र राजनीति में सक्रिय रहने के साथ उन्होंने पढ़ाई में भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी. विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाने और उनके समाधान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद करने के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया.
खोरठा को बनाया अपनी पढ़ाई का विषय
रवि ने झारखंड की क्षेत्रीय भाषा खोरठा को अपने अध्ययन का विषय चुना. खोरठा में विश्वविद्यालय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल करना न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी गौरव की बात है. उनकी सफलता ऐसे युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो अपनी स्थानीय भाषा, संस्कृति और परंपरा से जुड़े रहकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं.
किसान परिवार से निकलकर रांची तक का सफर
चतरा जिले के सुदूर ग्रामीण इलाके से आने वाले रवि के माता-पिता किसान हैं. सीमित संसाधनों वाले परिवार से आने के बावजूद उन्होंने रांची में रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखी. मेहनत, लगन और लगातार अध्ययन के दम पर उन्होंने खोरठा विषय में विश्वविद्यालय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया. रवि की कहानी ग्रामीण क्षेत्र के उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण बड़े सपने देखने से हिचकते हैं.
सफलता का श्रेय शिक्षकों और माता-पिता को दिया
अपनी इस उपलब्धि का श्रेय रवि ने अपने गुरु एवं विभागाध्यक्ष विनोद कुमार, सुशीला कुमारी और सूचित कुमार के साथ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव मनोहर, कुलसचिव प्रो. बासुदेव धनंजय दुबे और अपने माता-पिता को दिया है. रवि के मुताबिक, शिक्षकों का मार्गदर्शन, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों का प्रोत्साहन और परिवार के सहयोग के साथ लगातार मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया.
छात्र राजनीति के साथ पढ़ाई को भी दी प्राथमिकता
रवि ने कहा कि छात्र राजनीति में सक्रिय रहते हुए पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं था. विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाने और उनके समाधान के लिए लगातार काम करने के साथ उन्होंने पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दिया. उनका कहना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और परिवार व शिक्षकों का सहयोग मिले, तो सीमित संसाधनों के बावजूद सफलता हासिल की जा सकती है. रवि की इस उपलब्धि से उनके परिवार, शिक्षकों, दोस्तों और गांव के लोगों में खुशी का माहौल है. ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्वविद्यालय में गोल्ड मेडल हासिल करना न केवल उनके लिए बड़ी उपलब्धि है, बल्कि क्षेत्र के दूसरे विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का संदेश है.
