RANCHI : झारखंड में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत बनाने और गांवों में स्थानीय स्वशासन को प्रभावी बनाने के दावों के बीच अधिकारों के हस्तांतरण की स्थिति पर सवाल उठे हैं. राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पंचायतों के लिए निर्धारित 29 अधिकारों में से 13 विभागों ने केवल 22 अधिकार ही हस्तांतरित किए हैं. वहीं, तीन विभागों ने एक भी अधिकार पंचायतों को नहीं दिया है. इसका असर पंचायतों की निर्णय लेने की क्षमता और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ सकता है.
छह जिलों की पंचायतों की समीक्षा में सामने आई तस्वीर
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य वित्त आयोग ने संथाल परगना के छह जिलों-दुमका, देवघर, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़ और जामताड़ा के पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. इस दौरान पंचायतों को अधिकार सौंपने की स्थिति और ग्रामीण शासन की वास्तविक परिस्थितियों की समीक्षा की गई.

समीक्षा में सामने आया कि पंचायतों को अधिकारों का हस्तांतरण पूरी तरह नहीं हुआ है. रिपोर्ट में वन, ऊर्जा और श्रम विभाग द्वारा अधिकार हस्तांतरित नहीं किए जाने का उल्लेख किया गया है. वहीं, राजस्व विभाग ने भी सीमित अधिकार दिए हैं. पंचायतों को पर्याप्त अधिकार नहीं मिलने से स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने और विकास योजनाओं को लागू करने की उनकी क्षमता प्रभावित हो सकती है.
2. एक ही जिले की पंचायतों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर
रिपोर्ट में पंचायतों के प्रदर्शन के आकलन के लिए पंचायत एन्हांसमेंट इंडेक्स (पीईआई) 2.0 के अंकों का भी उल्लेख किया गया है. आंकड़े बताते हैं कि एक ही जिले की अलग-अलग पंचायतों के प्रदर्शन में काफी अंतर है. देवघर जिले में सबसे अधिक और सबसे कम अंक पाने वाली पंचायतों के बीच बड़ा अंतर दर्ज किया गया है. मधुगढ़ पंचायत- 71.71 अंक,कनगढ़ा पंचायत- 37.13 अंक,अंतर- 34.58 अंक, इसी तरह जामताड़ा की दो पंचायतों के अंकों में 34.41 का अंतर दर्ज किया गया है.
अन्य जिलों में भी पंचायतों के प्रदर्शन में असमानता सामने आई है. गोड्डा- 30.52 अंकों का अंतर, साहिबगंज- 29 अंकों का अंतर,दुमका- 20.01 अंकों का अंतर,पाकुड़- 12.43 अंकों का अंतर ये आंकड़े संकेत देते हैं कि पंचायतों के प्रदर्शन में एकरूपता नहीं है. हालांकि, केवल इन अंकों के आधार पर अंतर के कारणों का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा. इसके लिए पंचायतों को उपलब्ध संसाधनों, कर्मचारियों, अधिकारों और योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का भी आकलन जरूरी है.
3. चार जिलों में महिला साक्षरता दर 50 प्रतिशत से कम
रिपोर्ट में महिला साक्षरता को लेकर भी चिंता जताई गई है. इसके अनुसार, संथाल परगना के चार जिलों-दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज में महिलाओं की साक्षरता दर 50 प्रतिशत से कम है. आयोग ने इस स्थिति में सुधार के लिए विशेष प्रयास करने की जरूरत बताई है. पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया है. महिला साक्षरता का सवाल केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है. इसका संबंध सरकारी योजनाओं की जानकारी, अधिकारों के प्रति जागरूकता और स्थानीय निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी से भी है.
4. पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए संपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल का सुझाव
पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए आयोग ने जिला परिषदों को अपनी संपत्तियों से राजस्व बढ़ाने का सुझाव दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पंचायतों और जिला परिषदों के पास उपलब्ध भवन, दुकानें, बस स्टैंड और दूसरी परिसंपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करके आय बढ़ाई जा सकती है.
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जिला परिषदों के भवनों के नक्शे की स्वीकृति जैसे अधिकार उपलब्ध होने के बावजूद उनका समुचित इस्तेमाल नहीं हो रहा है. यदि स्थानीय निकाय अपनी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करें, तो उनकी आय बढ़ सकती है और विकास कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधनों में सुधार हो सकता है.
5. पैसे के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत
आयोग ने अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता बताई है.इसके साथ ही पंचायती राज विभाग और पेयजल विभाग के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है, ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी तरीके से हो सके.
पंचायतों को केवल जिम्मेदारियां सौंपना पर्याप्त नहीं है. उनके पास उन जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त अधिकार, वित्तीय संसाधन और प्रशासनिक सहयोग भी होना चाहिए.
पंचायतों के सामने सबसे बड़ा सवाल: अधिकार कब मिलेंगे?
झारखंड में ग्रामीण विकास की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण है. लेकिन यदि पंचायतों को निर्धारित अधिकार पूरी तरह नहीं मिलते, तो स्थानीय जरूरतों के अनुसार निर्णय लेने की उनकी क्षमता सीमित हो सकती है. राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट में अधिकारों के हस्तांतरण, पंचायतों के प्रदर्शन में अंतर, महिला साक्षरता और स्थानीय निकायों की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों को सामने रखा गया है.
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संबंधित विभाग पंचायतों को शेष अधिकार कब तक सौंपेंगे और वित्तीय व प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे.
