TRI:किसी भी देश की भाषा आज के दौर में कितनी महत्वपूर्ण है इससे हरकोई किसी वाकिफ है। भाषा ने जिस तरह पूरी दुनिया को एक छत्रछाया में इकट्ठा किया है जिसके परिणाम स्वरूप मनुष्य समाज का मानसिक विकास हो पाया और मनुष्य पाषाण युग से निकलकर वर्तमान युग तक पहुंचे हैं। भाषाएं टाइम कैप्सूल की तरह होती है जिनमें सभ्यता संस्कृति की चीजें निहित होती हैं। जहां पूरे विश्व में हजारों भाषा समूह पाई जाती हैं वही आदिवासी भाषाओं की अपनी अलग महत्व होती है और हर आदिवासी समुदाय को अपनी भाषा को बढ़ावा देनी चाहिए,ताकि समाज के साथ उनकी भाषाएं भी सुरक्षित हो सकें। मूल चेतना का विकास भी सिर्फ अपनी भाषा में ही हो सकता है। उपर्युक्त बातें साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने कही,जो डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातिय शोध संस्थान में शुक्रवार से हुई दो दिवसीय खड़िया भाषा सम्मेलन में बोल रहे थे। बताते चले कि साहित्य अकादमी दिल्ली, प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन और मोराबादी स्थित T R I के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है जो 6 जुलाई तक रहेगी।
