RANCHI : JSSC CGL की चयनित अभ्यर्थियों का आंदोलन गुरुवार को तीसरे दिन भी जारी रहा, लेकिन गुरुवार के प्रदर्शन में अभ्यर्थियों का आक्रोश बेहद गंभीर रूप में सामने आया. प्रोजेक्ट भवन के मुख्य गेट के सामने प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने गले में फंदा डालकर विरोध जताया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर उनकी नौकरी वापस नहीं की गई, तो वे फंदा डालकर जान देने जैसा कदम उठाने को मजबूर हो जाएंगे. अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्षों की मेहनत, परीक्षा और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें सरकारी नौकरी मिली थी. नियुक्ति पत्र मिलने के बाद उन्होंने करीब सात महीने तक सरकारी विभागों में काम भी किया. अब अचानक नियुक्ति रद्द होने के फैसले ने उन्हें फिर बेरोजगारी के मुहाने पर खड़ा कर दिया है.
नौकरी नहीं तो कुछ नहीं बचा
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि नौकरी मिलने के बाद उनके परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां इसी आय से जुड़ गई थीं. कई अभ्यर्थियों ने नौकरी मिलने के बाद अपने भविष्य को लेकर बड़े फैसले लिए. अब नियुक्ति रद्द होने के बाद उनके सामने दोबारा नौकरी तलाशने की चुनौती है. इसी गुस्से और निराशा के बीच कुछ अभ्यर्थियों ने गले में फंदा डालकर सरकार के फैसले का विरोध किया.
परीक्षा से नियुक्ति तक… फिर नौकरी बचाने की लड़ाई
JSSC CGL की पहली परीक्षा जनवरी 2024 में हुई थी. परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद इसे रद्द कर दिया गया. इसके बाद सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा आयोजित हुई. दूसरी परीक्षा को लेकर भी विवाद हुआ और मामला हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. कानूनी प्रक्रिया के बाद नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ और 31 दिसंबर 2025 को चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए. अभ्यर्थियों के मुताबिक, करीब सात महीने तक नौकरी करने के बाद अब नियुक्ति रद्द किए जाने का फैसला उनके सामने नई मुश्किल लेकर आया है.
अब दोबारा परीक्षा कैसे देंगे?
अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की ओर से दोबारा परीक्षा की बात कही जा रही है, लेकिन कई चयनित अभ्यर्थी अब उम्र सीमा के करीब पहुंच चुके हैं. ऐसे में दोबारा परीक्षा देना उनके लिए आसान नहीं होगा. उनका सवाल है कि जब चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें नियुक्ति दी गई और उन्होंने सरकारी विभागों में काम भी किया, तो अब उनकी गलती के बिना नौकरी क्यों छीनी जा रही है?
कुटे मैदान जाने से इनकार
प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को प्रोजेक्ट भवन से हटकर कुटे मैदान में धरना देने को कहा. लेकिन अभ्यर्थियों ने वहां जाने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि कुटे मैदान शहर से दूर है और वहां प्रदर्शन करने से उनकी आवाज सरकार तक नहीं पहुंचेगी. इसलिए वे प्रोजेक्ट भवन के मुख्य गेट के सामने ही धरना जारी रखना चाहते हैं. अभ्यर्थियों ने सरकार से नियुक्ति रद्द करने का फैसला वापस लेने और उन्हें तत्काल बहाल करने की मांग की है. उनका कहना है कि जब तक इस पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा.
