RANCHI / HAZARIBAGH : साड़ी का पल्लू संभालते हुए जब प्रियंका 1600 मीटर की दौड़ में उतरीं, तो स्टेडियम में मौजूद लोगों की निगाहें उन पर टिक गईं. पैरों में दौड़ पूरी करने का संकल्प था और मन में अपने बेटे से दोबारा मिलने की आस. हजारीबाग जिले के इचाक की रहने वाली प्रियंका के लिए यह दौड़ महज एक शारीरिक परीक्षा नहीं, बल्कि अपने जीवन को नई दिशा देने की कोशिश है.
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— Loktantra19 (@theLoktantra19) October 14, 2026
प्रियंका होमगार्ड बनकर आत्मनिर्भर होना चाहती हैं. लेकिन इस लक्ष्य के पीछे एक ऐसी पारिवारिक कहानी है, जिसका सबसे भावुक पहलू अपने बेटे से मिलने की उनकी इच्छा है.
चार साल से पति से अलग रहने का दावा, बेटे से मिलने में परेशानी
प्रियंका का दावा है कि वह पिछले करीब चार वर्षों से अपने पति से अलग रह रही हैं और उनका बेटा पिता के पास रहता है. उनके मुताबिक, जब वह अपने बेटे से मिलने के लिए ससुराल जाती हैं, तो उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट की जाती है. उनका कहना है कि कई बार उन्हें बच्चे से मिले बिना ही वापस लौटना पड़ा.
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प्रियंका ने यह भी दावा किया है कि उनके बेटे को बताया गया है कि उसकी मां की मृत्यु हो चुकी है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. मामले में दूसरे पक्ष का बयान भी सामने आना बाकी है. प्रियंका के मुताबिक, उनके पति ने अदालत में तलाक का मामला भी दायर किया है. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें कानूनी लड़ाई लड़ने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
साड़ी पहनकर दौड़ीं प्रियंका, होमगार्ड बनने का है लक्ष्य
पारिवारिक मुश्किलों के बीच प्रियंका ने अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला किया है. इसी दिशा में उन्होंने होमगार्ड भर्ती की तैयारी शुरू की. हजारीबाग डिफेंस एकेडमी की ओर से सत्तू लंबा स्टेडियम में 1600 मीटर की दौड़ का ट्रायल आयोजित किया गया था. इसी ट्रायल में प्रियंका साड़ी पहनकर दौड़ने पहुंचीं. सीमित संसाधनों और निजी जीवन की चुनौतियों के बीच उनका दौड़ में हिस्सा लेना वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचने वाला रहा. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने ट्रायल में अच्छा प्रदर्शन किया.

प्रियंका के इस प्रयास की जानकारी मिलने के बाद डिफेंस एकेडमी के कोच राहुल यादव ने उनकी मदद करने का फैसला किया. उन्होंने प्रियंका को निशुल्क प्रशिक्षण किट उपलब्ध कराई और होमगार्ड भर्ती के लिए मुफ्त शारीरिक प्रशिक्षण देने की पेशकश की.
नौकरी की तैयारी के साथ बेटे से मिलने की उम्मीद
प्रियंका के लिए होमगार्ड की नौकरी केवल रोजगार पाने का जरिया नहीं है. वह आर्थिक रूप से मजबूत बनना चाहती हैं, ताकि अपने जीवन से जुड़े फैसले खुद ले सकें और आगे की चुनौतियों का सामना कर सकें. हालांकि, नौकरी की तैयारी के साथ उनकी एक निजी इच्छा भी जुड़ी हुई है-अपने बेटे से दोबारा मिलना. वह चाहती हैं कि परिस्थितियां बदलें और उन्हें अपने बच्चे के साथ समय बिताने का अवसर मिले.
प्रियंका की कहानी यह सवाल भी उठाती है कि पारिवारिक विवादों के बीच बच्चों और अभिभावकों के रिश्तों को किस तरह प्रभावित होने से बचाया जा सकता है. हालांकि, इस मामले में सभी पक्षों की बात और संबंधित तथ्यों की पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.
फिलहाल प्रियंका ने अपने भविष्य के लिए दौड़ना शुरू कर दिया है. साड़ी पहनकर 1600 मीटर की दौड़ पूरी करने की उनकी कोशिश एक नई शुरुआत का संकेत है. उनके सामने रास्ता आसान नहीं है, लेकिन होमगार्ड बनने का संकल्प उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है. उनके लिए सबसे बड़ी उम्मीद आज भी यही है कि एक दिन वह अपने बेटे को फिर से गले लगा सकें.
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