RANCHI/GUMLA : किसी गांव की असली तस्वीर वहां रहने वाले लोगों की जिंदगी देखकर समझ आती है. जब सड़क खराब हो, पीने के लिए साफ पानी न मिले और बीमार पड़ने पर अस्पताल पहुंचना भी मुश्किल हो, तो रोजमर्रा की जिंदगी कितनी कठिन हो जाती है, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं है. झारखंड के गुमला जिले के रायडीह प्रखंड की कोब्जा पंचायत के कोट्रोजहारिया, लकड़ाकोना और बेलदुआ के ग्रामीण ऐसी ही परेशानियों से जूझने की बात कह रहे हैं. उनका कहना है कि सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए उन्हें आज भी इंतजार करना पड़ रहा है.

बरसात आते ही बढ़ जाती है सड़क की परेशानी
गांव में रहने वाले लोगों के लिए सड़क सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जरूरत है. इसी रास्ते से बच्चे स्कूल जाते हैं, लोग बाजार पहुंचते हैं और जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल ले जाया जाता है. लेकिन इलाके की सड़क की हालत खराब है और बरसात के दिनों में परेशानी और बढ़ जाती है. सोचिए, घर में कोई बीमार पड़ जाए और उसे अस्पताल ले जाना हो, लेकिन रास्ता ही ठीक न हो. ऐसे समय में परिवार की चिंता कितनी बढ़ जाती होगी. ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

पानी के लिए भी परेशानी, डोभा का पानी पीने योग्य नहीं
सड़क के बाद दूसरी बड़ी समस्या पीने के पानी की है. ग्रामीणों के मुताबिक, इलाके में जलमीनार की व्यवस्था नहीं है. पानी के लिए एक डोभा है, लेकिन उसका पानी भी पीने योग्य नहीं है. पानी इंसान की सबसे बुनियादी जरूरत है. हर परिवार चाहता है कि उसके घर में साफ पानी मिले, ताकि बच्चों और बुजुर्गों को पानी के लिए परेशान न होना पड़े. लेकिन जब साफ पेयजल की सही व्यवस्था ही ना हो, तो लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं. ग्रामीणों की मांग है कि इलाके में पेयजल की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें इस बुनियादी जरूरत के लिए परेशान न होना पड़े.

नेताओं से उम्मीद, लेकिन ग्रामीणों को अब भी इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क और पानी की समस्याओं को लेकर नेताओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई है. इसके बावजूद उन्हें अब तक स्थायी समाधान नहीं मिला है.लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि चुनाव के समय नेता गांव-गांव पहुंचते हैं और वोट मांगते हैं, यहाँ तक की घर से उठा कर वोट दिलवाया जाता हैं , लेकिन चुनाव के बाद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता. ग्रामीण चाहते हैं कि जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि आम दिनों में भी उनके गांव पहुंचें और उनकी परेशानियों को समझें. ग्रामीण पूछते है की जब गांव के लोग वोट देकर सरकार चुनते हैं, तो उन्हें सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए इतना इंतजार क्यों करना पड़ता है? और इतने इंतज़ार के बाद में कोई उनकी सुध नहीं लेता.

अब वोट बहिष्कार और आंदोलन की चेतावनी
समस्याओं का समाधान नहीं होने से नाराज कुछ ग्रामीणों ने आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार करने की बात कही है. उनका कहना है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन करेंगे. ग्रामीणों ने उपायुक्त कार्यालय का घेराव और सड़क जाम करने जैसे कदम उठाने की चेतावनी भी दी है. यह नाराजगी उन लोगों की है, जो अपने गांव में बेहतर सड़क, साफ पानी और जरूरी सुविधाएं चाहते हैं. उनकी मांग किसी बड़ी चीज की नहीं, बल्कि ऐसी बुनियादी व्यवस्था की है, जिसके सहारे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी थोड़ी आसान हो सके.
अब प्रशासन की बारी, कब बदलेगी गांव की तस्वीर?
कोट्रोजहारिया, लकड़ाकोना और बेलदुआ के ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की है. उनकी प्राथमिक मांग सड़क की सुविधा बेहतर करने और साफ पेयजल उपलब्ध कराने की है. साथ ही, वे चाहते हैं कि गांवों में बिजली समेत अन्य जरूरी सुविधाओं की स्थिति भी सुधारी जाए.
अब सवाल यह है कि ग्रामीणों की आवाज जिम्मेदार अधिकारियों तक कब पहुंचेगी और उनकी समस्याओं का समाधान कब होगा. गांव का विकास तभी सही मायने में होगा, जब वहां रहने वाले लोगों को भी जरूरी सुविधाएं मिलेंगी. ग्रामीणों को बड़े-बड़े वादे नहीं, अपने गांव में सड़क और पीने के लिए साफ पानी चाहिए. अब देखना है कि उनकी यह उम्मीद कब पूरी होती है.
