BOKARO : बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के एक छोटे से गांव से निकलकर छोटी कुमारी ने वह कर दिखाया है, जो आज पूरे झारखंड के लिए प्रेरणा बन गया है. सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश के बीच पली-बढ़ी छोटी ने अपनी मेहनत, अनुशासन और परिवार के अटूट सहयोग के दम पर इंटरमीडिएट आर्ट्स की मेरिट लिस्ट में शीर्ष स्थान हासिल किया.
छोटी की इस ऐतिहासिक सफलता ने न सिर्फ उनके माता-पिता और शिक्षकों को गर्व महसूस कराया है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है. आज उनकी कहानी हर उस छात्र के लिए उम्मीद बन गई है, जो छोटे गांव से बड़े सपने देखता है.

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संघर्ष, अनुशासन और सपनों की कहानी
छोटी कुमारी ने अपनी सफलता के पीछे नियमित पढ़ाई, समय प्रबंधन और परिवार के सहयोग को सबसे बड़ी ताकत बताया. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में पढ़ाई के दौरान कई चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर मेहनत और आत्मविश्वास मजबूत हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती.

उपायुक्त अजय नाथ झा ने वीडियो कॉल पर दी बधाई
छोटी कुमारी की उपलब्धि की गूंज जिला प्रशासन तक भी पहुंची बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने वीडियो कॉल के माध्यम से छोटी से खास बातचीत की और उन्हें इस बड़ी सफलता के लिए बधाई दी. बातचीत के दौरान उपायुक्त ने कहा कि छोटी कुमारी आज पूरे झारखंड के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उन्होंने छोटी के भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली और आगे की पढ़ाई में हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया. उन्होंने कहा, “छोटी ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती. मेहनत और लगन से हर सपना पूरा किया जा सकता है.”
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जिला शिक्षा विभाग ने बताया प्रेरणादायक उपलब्धि
जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने भी छोटी कुमारी की सफलता को जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए गर्व का क्षण बताया. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास पैदा करेगी. प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि छोटी की उच्च शिक्षा में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी और उन्हें आगे बढ़ने के लिए हर जरूरी सहयोग दिया जाएगा. कसमार की शांत गलियों से निकलकर पूरे राज्य की सुर्खियों में आई छोटी कुमारी की कहानी यह साबित करती है कि झारखंड के गाँवों में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है. जरूरत सिर्फ सही मार्गदर्शन, मेहनत और हौसले की होती है.
आज छोटी कुमारी सिर्फ एक टॉपर नहीं, बल्कि उन हजारों छात्रों की प्रेरणा बन चुकी हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं.
