RANCHI : झारखंड हाई कोर्ट ने निजी जमीन से जुड़े विवादों में एक अहम अंतरिम आदेश जारी करते हुए अंचलाधिकारियों यानी सीओ द्वारा जमीन की मापी और सीमांकन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. यह फैसला जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने सुनाया, जिसमें प्रशासनिक हस्तक्षेप की सीमा को स्पष्ट किया गया है.अदालत ने साफ कहा कि निजी जमीन के मामलों में अंचल स्तर के अधिकारी किसी भी तरह का सीमांकन नहीं कर सकते. यदि दो पक्षों के बीच जमीन को लेकर विवाद होता है, तो उसका समाधान केवल सक्षम सिविल कोर्ट के माध्यम से ही किया जाएगा. कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि अब तक वे किस कानून और अधिकार के तहत निजी जमीन का सीमांकन कर रहे थे. मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी.
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यह मामला रूक्मिणी देवी द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया. याचिकाकर्ता ने अपनी निजी जमीन के सीमांकन के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने आरोप लगाया कि अंचल स्तर के अधिकारी बिना वैधानिक अधिकार के जमीन की मापी और सीमांकन कर रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है.सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि प्रशासनिक अधिकारी लगातार निजी जमीनों में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जबकि इसके लिए उनके पास स्पष्ट कानूनी अधिकार नहीं है.
इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए ऐसी सभी कार्रवाइयों पर रोक लगा दी.अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जमीन की मापी और सीमांकन एक न्यायिक प्रक्रिया है, जो सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आती है. कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि राज्य गठन के बाद किसी कैबिनेट निर्णय के आधार पर अंचल अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया है, तो वह न्यायिक अधिकारों का वैध हस्तांतरण नहीं माना जाएगा. न्यायिक अधिकारों को प्रशासनिक आदेश के जरिए ट्रांसफर नहीं किया जा सकता.
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