RANCHI : पलामू के मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (सदर), पलामू में तीन मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (OT) के निर्माण से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया पर लोकतंत्र 19 की खबर का असर हुआ है. टेंडर में कथित अनियमितता और ऑफलाइन निविदा प्रक्रिया अपनाए जाने को लेकर खबर प्रसारित होने के बाद झारखंड सरकार के भवन निर्माण विभाग ने मामले का संज्ञान लिया है.

भवन निर्माण विभाग के सरकार के विशेष सचिव की ओर से 13 सितंबर 2026 को डालटनगंज स्थित भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता महेंद्र राम को पत्र जारी कर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया है. विभाग ने संबंधित अधिकारी को 48 घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण समर्पित करने का निर्देश दिया है. साथ ही पत्र में कहा गया है कि स्पष्टीकरण नहीं देने पर नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
लोकतंत्र 19 ने उठाया था टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
दरअसल, लोकतंत्र 19 ने मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तीन मॉड्यूलर OT के निर्माण से जुड़े टेंडर को लेकर सवाल उठाए थे. रिपोर्ट में सामने आया था कि करीब 70 लाख 41 हजार 250 रुपये की लागत वाले प्रत्येक कार्य को लेकर टेंडर प्रक्रिया और बाद में सामने आई करीब 2 करोड़ 11 लाख 23 हजार 750 रुपये की कुल राशि वाली ऑफलाइन निविदा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
खबर में यह सवाल उठाया गया था कि अलग-अलग कार्यों को एक साथ जोड़कर बड़ी राशि का टेंडर क्यों तैयार किया गया और टेंडर प्रक्रिया में ऑनलाइन की जगह ऑफलाइन प्रक्रिया क्यों अपनाई गई.
विभाग ने खुद माना, 50 लाख से ऊपर के टेंडर ई-प्रोक्योरमेंट से होने चाहिए
अब विभाग की ओर से जारी पत्र में कार्यालय आदेश संख्या S-2163, दिनांक 19 नवंबर 2020 का हवाला दिया गया है. पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 50 लाख रुपये से अधिक राशि वाली सभी निविदाओं को ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली के तहत आमंत्रित करने का आदेश निर्गत है.
यही वजह है कि विभाग ने संबंधित कार्यपालक अभियंता से स्पष्टीकरण मांगा है कि इस मामले में कथित तौर पर ऑफलाइन टेंडर कैसे निकाला गया.
विभाग ने कहा – योजना भवन निर्माण विभाग से स्वीकृत नहीं
इस पत्र का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है. भवन निर्माण विभाग ने अपने पत्र में कहा है कि यह योजना भवन निर्माण विभाग से स्वीकृत या संबंधित नहीं है. पत्र के अनुसार, जिला स्तर पर इस योजना के क्रियान्वयन के लिए संबंधित अधिकारी को कार्य एजेंसी बनाया गया था. साथ ही उन्हें भवन निर्माण विभाग के अधीन कार्यपालक अभियंता, भवन प्रमंडल, डालटनगंज के रूप में पदस्थापित किया गया था.
विभाग ने सवाल उठाया है कि जब योजना भवन निर्माण विभाग से स्वीकृत या संबंधित नहीं थी, तो भवन निर्माण विभाग के नियमों की अनदेखी करते हुए इस योजना की निविदा आमंत्रित क्यों की गई.
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48 घंटे में देना होगा जवाब
भवन निर्माण विभाग ने पत्र में संबंधित कार्यपालक अभियंता से पूरे मामले पर अपना स्पष्टीकरण मांगा है. उन्हें निर्देश दिया गया है कि 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण विभाग को सौंपें.पत्र में यह भी कहा गया है कि स्पष्टीकरण समर्पित नहीं करने पर उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. यानी अब इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू होती दिखाई दे रही है.
अब बड़ा सवाल- टेंडर की प्रक्रिया में आखिर क्या हुआ?
लोकतंत्र 19 की खबर के बाद विभाग के इस पत्र ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि टेंडर ऑफलाइन क्यों निकाला गया. बल्कि सवाल यह भी है कि – तीन मॉड्यूलर OT के काम की टेंडर प्रक्रिया किस स्तर पर तय हुई? करीब 70.41 लाख रुपये की राशि वाले कार्यों और कुल 2.11 करोड़ रुपये की निविदा के बीच क्या संबंध है? 50 लाख रुपये से अधिक की निविदा के लिए ई-प्रोक्योरमेंट का आदेश होने के बावजूद ऑफलाइन टेंडर क्यों निकाला गया?
अब विभाग ने खुद संबंधित अधिकारी से 48 घंटे में जवाब मांगा है. ऐसे में इस स्पष्टीकरण के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अधिकारी की ओर से क्या जवाब दिया जाता है और विभाग आगे क्या कार्रवाई करता है.
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