RANCHI : झारखंड हाईकोर्ट ने रांची जिले की करीब 8 दशक पुरानी सीएनटी भूमि विवाद में बड़ा फैसला सुनाया है.
जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि 1988 में एसएआर अधिकारी द्वारा दिया गया आदेश पूरी तरह वैध है और उसी को अंतिम माना जाएगा.
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अदालत ने 19 वर्ष बाद दोबारा शुरू की गई एसएआर कार्यवाही को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया.
यह विवाद रांची के चान्हो स्थित खाता संख्या-41, प्लॉट संख्या-610 की 1.32 एकड़ जमीन से जुड़ा था.
प्रार्थी अमर कुमार चौधरी के पिता ने 1947 में यह जमीन तत्कालीन रैयत कुसल कुजूर से 2500 रुपये में खरीदी थी.
अनुमति न मिलने से बिक्री की औपचारिकता पूरी नहीं हो सकी, लेकिन परिवार का कब्जा बना रहा. 1962 में विवाद पर टाइटल सूट हुआ जिसका 1965 में समझौते से निपटारा हो गया.
इसके बाद 1986-87 में पहली एसएआर केस दायर हुई.26 अगस्त 1988 को एसएआर अधिकारी ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के पिता समान क्षेत्रफल की दूसरी जमीन प्रतिवादी को दें.
इस आदेश के अनुपालन में सितंबर 1988 में रजिस्टर्ड सेल डीड हुई और म्यूटेशन भी कर दिया गया. इस आदेश को कभी किसी कोर्ट में चुनौती नहीं दी गई, इसलिए वह अंतिम हो गया.
वर्ष 2006 में प्रतिवादी पक्ष ने फिर से एसएआर केस-13/2006-07 दायर किया. एसएआर अधिकारी ने इसे पहले से निष्पादित मानकर खारिज कर दिया.
लेकिन एडिशनल कलेक्टर ने 28 जून 2008 को अपील स्वीकार कर 2007 के आदेश के साथ 1988 के मूल आदेश को भी रद्द कर दिया.
प्रमंडलीय आयुक्त ने 21 अक्टूबर 2008 को इसे बरकरार रखा.प्रार्थी ने इन दोनों आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी.
जस्टिस द्विवेदी ने फैसले में कहा कि जिस मामले का निपटारा हो चुका हो और आदेश अंतिम रूप ले चुका हो, उसे 40-50 साल बाद दोबारा नहीं खोला जा सकता.
अदालत ने 2008 के एडिशनल कलेक्टर और प्रमंडलीय आयुक्त के आदेश को निरस्त कर दिया. साथ ही प्रार्थी की रिट याचिका स्वीकार कर ली.
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