Ranchi /HAZARIBAGH : हजारीबाग के SP अमन कुमार ने होमगार्ड जवान से कथित मारपीट के मामले में सख्त कार्रवाई की है. उन्होंने आंगो थाना के तत्कालीन प्रभारी जानू कुमार को कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया और लाइन हाजिर कर दिया. आंगो थाना की जिम्मेदारी अब साइबर सेल के सब-इंस्पेक्टर दीपक कुमार को सौंपी गई है. मामला आंगो थाना परिसर से जुड़ा है. दारू अंचल में तैनात होमगार्ड जवान मनोज कुमार सिन्हा अपने एक साथी जवान से मिलने मोटरसाइकिल से आंगो थाना पहुंचे थे. जवान का आरोप है कि थाना परिसर में बाइक खड़ी करने को लेकर तत्कालीन थाना प्रभारी जानू कुमार से उनका विवाद हो गया.

मनोज कुमार सिन्हा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि मामूली विवाद के बाद उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई. उनका दावा है कि उन्हें करीब सात से आठ घंटे तक थाने में जबरन रोके रखा गया. आरोप है कि उनके पैर बांधकर लाठियों से पिटाई की गई, जिससे उनके हाथ की एक उंगली टूट गई और शरीर पर चोटें आईं.
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पीड़ित जवान ने अधिकारियों से की शिकायत
घटना के बाद होमगार्ड जवान ने विष्णुगढ़ SDPO फौजान अहमद और हजारीबाग SP अमन कुमार को लिखित शिकायत दी. शिकायत में उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. वहीं, तत्कालीन थाना प्रभारी जानू कुमार ने होमगार्ड जवान के आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि जवान नशे की हालत में थाना पहुंचा था और वहां हंगामा कर रहा था.
एसोसिएशन ने जताई नाराजगी
मामला सामने आने के बाद झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन में भी नाराजगी सामने आई. घटना को लेकर पुलिस के व्यवहार और थाने में होमगार्ड जवान के साथ कथित मारपीट पर सवाल उठाए गए. मामले की गंभीरता को देखते हुए SP अमन कुमार ने तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की और थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया.
अब जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
SP की कार्रवाई के बाद यह साफ संदेश गया है कि पुलिस विभाग के भीतर भी किसी कर्मचारी या अधिकारी पर लगे गंभीर आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. हालांकि, होमगार्ड जवान और तत्कालीन थाना प्रभारी की ओर से सामने आए दावों के बीच पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है. ऐसे में पद या वर्दी से अलग कानून के मुताबिक जवाबदेही तय करना पुलिस प्रशासन में भरोसा बनाए रखने के लिए अहम माना जाता है.
