PETAWAR / RANCHI : सरकार से सड़क की मांग करते-करते जब ग्रामीण थक गए, तो गांव की महिलाओं ने खुद ही सड़क की मरम्मत का जिम्मा उठा लिया. झारखंड के गोमिया विधानसभा क्षेत्र के पेटरवार प्रखंड स्थित जाराडीह गांव से सामने आई यह तस्वीर ग्रामीण महिलाओं के हौसले की मिसाल पेश करने के साथ-साथ सरकारी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है. जाराडीह गांव की सड़क लंबे समय से जर्जर स्थिति में थी. सड़क पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण ग्रामीणों को आने-जाने में काफी परेशानी होती थी. बारिश के दौरान स्थिति और भी खराब हो जाती थी. बच्चों को स्कूल जाने, लोगों को बाजार पहुंचने और मरीजों को अस्पताल ले जाने तक में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था.

शिकायत के बाद भी नहीं बनी सड़क
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली को लेकर कई बार जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत की गई. मंत्री और विधायक तक अपनी समस्या पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला. इसके बाद ग्रामीणों ने इंतजार करना छोड़ दिया और खुद सड़क की मरम्मत करने का फैसला लिया. ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाया और सड़क की मरम्मत का काम शुरू किया.

महिलाओं ने संभाली सड़क की जिम्मेदारी
इस पूरे काम में गांव की महिलाओं ने सबसे अहम भूमिका निभाई. महिलाओं ने खुद गिट्टी और मिट्टी उठाई और सड़क को समतल करने में जुट गईं. किसी ने सड़क पर मिट्टी डाली, तो किसी ने गिट्टी फैलाकर गड्ढों को भरने का काम किया. ग्रामीणों का कहना है कि अगर उनकी समस्या समय पर सुनी जाती, तो उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने और खुद सड़क की मरम्मत करने की जरूरत नहीं पड़ती. हालांकि, ग्रामीणों की मांग अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. उनका कहना है कि उन्होंने फिलहाल सड़क को चलने लायक बनाने की कोशिश की है, लेकिन गांव को स्थायी राहत के लिए पक्की सड़क चाहिए. ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मामले का संज्ञान लेते हुए जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग की है. जाराडीह की महिलाओं ने अपने स्तर पर सड़क की मरम्मत कर एक मिसाल जरूर पेश की है, लेकिन अब सवाल सरकार से है जब गांव की महिलाएं अपने पैसे और मेहनत से सड़क बना सकती हैं, तो फिर सरकारी सड़क के लिए ग्रामीणों को आखिर कितना और इंतजार करना पड़ेगा?
