RANCHI/LATEHAR : झारखंड के लातेहार जिले में एक आदिवासी महिला के साथ कथित मारपीट, यौन दुर्व्यवहार और हिरासत में प्रताड़ना का मामला सामने आया है. हेरहंज थाना क्षेत्र की रहने वाली 33 वर्षीय पुनिया देवी ने बारियातू थाना प्रभारी प्रभात कुमार दास और अन्य पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है. मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी संज्ञान लिया है और लातेहार पुलिस को तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
बकरी चराने के दौरान पकड़े जाने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, पुनिया देवी ने अपनी शिकायत में बताया है कि 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब दो बजे वह बकरी चरा रही थीं. इसी दौरान सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिसकर्मियों ने उन्हें कथित तौर पर पोस्ता की खेती और कारोबार में संलिप्त होने के आरोप में पकड़ लिया. पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें बारियातू थाने ले जाया गया. शिकायत के मुताबिक, रास्ते में भी उनके साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया.
थाने में प्रताड़ना और जातिसूचक गाली देने का आरोप
पुनिया देवी ने आरोप लगाया है कि थाने में उनके हाथ-पैर बांधकर उन्हें उल्टा लटकाया गया और डंडे से पीटा गया. उन्होंने पुलिसकर्मियों पर जातिसूचक गालियां देने और यौन दुर्व्यवहार करने का भी आरोप लगाया है. शिकायत के अनुसार, 6 अक्टूबर को रिहा करने से पहले महिला पर वीडियो में पोस्ता की खेती से जुड़े होने की बात स्वीकार करने का दबाव बनाया गया. पीड़िता का आरोप है कि उनसे जबरन बयान दिलवाया गया. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. मामले की जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी.

80 हजार रुपये ले जाने का भी आरोप
इस मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है. पुनिया देवी और उनके परिजनों की ओर से दावा किया गया है कि घर में शादी के लिए जमा किए गए 80 हजार रुपये पुलिसकर्मी ले गए. शिकायत में इस रकम को लेकर भी कार्रवाई की मांग की गई है. हालांकि, कथित रकम की बरामदगी या लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि करने वाली जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान
मामले को लेकर सोशल मीडिया पर शिकायत किए जाने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 9 अक्टूबर 2026 को लातेहार पुलिस को टैग करते हुए तत्काल संज्ञान लेने, जांच करने और उचित कार्रवाई कर सूचना देने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा, “यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है.”

इसके बाद लातेहार पुलिस की ओर से बताया गया कि मामले की जांच के लिए बालूमाथ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और एक महिला पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में टीम गठित की गई है. पुलिस के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.
अब निष्पक्ष जांच और जवाबदेही पर नजर
इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली, हिरासत में नागरिकों के साथ व्यवहार और आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करना जरूरी होगा. फिलहाल, मामले में जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाती है.
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