RANCHI / DUMKA : झारखंड के दुमका जिले में एक नाबालिग आदिवासी छात्रा की मौत के बाद आक्रोश बढ़ता जा रहा है. काठीकुंड थाना क्षेत्र में नौवीं कक्षा की छात्रा का शव मिलने के बाद छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. सोमवार शाम निकाले गए कैंडल मार्च में मृतका को श्रद्धांजलि दी गई और पुलिस प्रशासन से मामले में जल्द कार्रवाई करने की मांग की गई. छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 14 अक्टूबर तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो 15 अक्टूबर को झारखंड बंद किया जाएगा.
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए.
10 अक्टूबर की रात झाड़ियों में मिला था छात्रा का शव
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 की रात काठीकुंड थाना क्षेत्र में छात्रा का शव उसके घर से करीब 500 मीटर दूर झाड़ियों में मिला था. घटना में दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, घटना की वास्तविक परिस्थितियों और अपराध में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर पुलिस की जांच जारी है.

छात्रा की मौत की खबर सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया. सोमवार को विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन कर मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए.
छात्र संगठनों ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
झारखंड छात्र सभा और झारखंड छात्र समन्वय समिति के बैनर तले सोमवार शाम कैंडल मार्च निकाला गया. इसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए. मार्च के दौरान मृतका को श्रद्धांजलि दी गई और न्याय की मांग उठाई गई.झारखंड छात्र समन्वय समिति के अध्यक्ष श्यामदेव हेंब्रम ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल के विधायक और सांसद इस घटना पर खुलकर आवाज नहीं उठा रहे हैं.
उन्होंने गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन का भी उल्लेख करते हुए महिला जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाए. हेंब्रम ने कहा कि यदि 14 अक्टूबर तक मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो 15 अक्टूबर को पूरे झारखंड में बंद का आह्वान किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति के लिए राज्य सरकार और दुमका जिला प्रशासन जिम्मेदार होंगे. यह बंद की चेतावनी छात्र समन्वय समिति की ओर से दी गई है. इसे लेकर आगे की स्थिति और आंदोलन की रूपरेखा पर सबकी नजर रहेगी.

बेटियों की सुरक्षा पर सवाल, पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग
झारखंड छात्र सभा की ओर से निकाले गए कैंडल मार्च में शामिल शिक्षिका सुमिता सिंह ने छात्राओं की सुरक्षा पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से बच्चियों और उनके परिवारों में भय का माहौल पैदा होता है. उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले में जल्द कार्रवाई करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की. साथ ही, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की बात भी कही.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में कई छात्राओं को स्कूल पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. कुछ क्षेत्रों में रास्ते सुनसान हैं और जंगल-झाड़ियों से होकर गुजरते हैं. ऐसे में छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है.
इस घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल आने-जाने वाली बच्चियों की सुरक्षा की नियमित समीक्षा किस तरह की जाती है. हालांकि, काठीकुंड की घटना में किसी विशेष सुरक्षा व्यवस्था की कमी रही या नहीं, इसका निर्धारण तथ्यों और जांच के आधार पर ही किया जा सकता है.
एसपी के नेतृत्व में एसआईटी गठित, संदिग्धों से पूछताछ
मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है. दुमका के पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार के अनुसार, संथाल परगना क्षेत्र के डीआईजी अंबर लकड़ा ने उनके नेतृत्व में एसआईटी गठित की है. इस जांच दल में सदर एसडीपीओ दिलीप खलको समेत कई थाना प्रभारी शामिल हैं.

एसपी ने बताया कि मृतका के परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ तथा अब तक के अनुसंधान में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है. मामले में संदिग्धों से पूछताछ भी की जा रही है. पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस जल्द ही घटना का खुलासा करने का प्रयास कर रही है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
अब जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
दुमका की इस घटना ने छात्राओं की सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की जरूरत पर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है. छात्र संगठन जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पुलिस कब तक मामले की स्थिति स्पष्ट कर पाती है. साथ ही, पीड़ित परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत भी बनी हुई है.
फिलहाल, छात्र समन्वय समिति ने 14 अक्टूबर तक गिरफ्तारी की मांग करते हुए 15 अक्टूबर को झारखंड बंद की चेतावनी दी है. आने वाले दिनों में पुलिस की जांच और प्रशासन की कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी.
