रांची : झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भाजपा नेता और विधायक भानु प्रताप शाही के एक सोशल मीडिया वीडियो के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. शाही ने एक वीडियो पोस्ट कर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि झारखंड में मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिल रही, जबकि एंबुलेंस में बकरियां लादी जा रही हैं.
का जी #Irfan_Ansari जी..
ये झारखंड है बाबू यहाँ #एम्बुलेंस में बकरी 🐐 लोड होता है मरीज नहीं ..??🤔
@IrfanAnsariMLA @BJP4India @BJP4Jharkhand https://t.co/4kdiAtXZ5L
— Bhanu Pratap Shahi (@ShahiPratap) October 7, 2026
भाजपा नेता ने वीडियो में स्वास्थ्य मंत्री से सवाल करते हुए कहा कि अगर मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिल रही और उसमें बकरियां ले जाई जा रही हैं, तो क्या यह व्यवस्था मंत्री के रिश्तेदारों के लिए है. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री पर तीखी टिप्पणी करते हुए इस मामले में जवाब मांगा. लेकिन अब इस वायरल वीडियो की लोकेशन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. उपलब्ध रिपोर्टों और बांग्लादेशी मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार, बकरियों को एंबुलेंस में ले जाने की यह घटना झारखंड की नहीं, बल्कि बांग्लादेश के बागेरहाट जिले के मोंगला इलाके की बताई गई है.
बांग्लादेश में हुई थी एंबुलेंस में बकरियां ले जाने की घटना
बांग्लादेशी समाचार माध्यम Prothom Alo ने 4 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में बताया कि बागेरहाट के मोंगला पोर्ट नगरपालिका की एंबुलेंस में बकरियां ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. रिपोर्ट के मुताबिक, बकरियों को खुलना के जीरो प्वाइंट इलाके से मोंगला ले जाया गया था. बांग्लादेश के NTV Online ने भी 3 अक्टूबर को इसी घटना की रिपोर्ट प्रकाशित की. रिपोर्ट में बताया गया कि मरीजों को ले जाने वाली नगरपालिका की एंबुलेंस में बकरियों को ले जाने का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी फैल गई.

वहीं Ittefaq ने भी 4 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में मोंगला पोर्ट नगरपालिका की एंबुलेंस में बकरियां ले जाने की घटना का जिक्र किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, घटना 29 सितंबर की रात की थी और बकरियों को खुलना के जीरो प्वाइंट से मोंगला ले जाया गया था.
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छह बकरियां एंबुलेंस में ले जाने की बात
बांग्लादेशी रिपोर्टों के अनुसार, एंबुलेंस चालक मोहम्मद शरीफुल ने 29 सितंबर की रात खुलना के जीरो प्वाइंट से छह बकरियों को एंबुलेंस में लादा और उन्हें मोंगला ले गया. Voice7 News की रिपोर्ट के मुताबिक, बकरियां मोंगला के कारोबारी और बकरी व्यापारी मोहम्मद राशिद की थीं. घटना का वीडियो मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने रिकॉर्ड किया था, जिसके बाद यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आता है. सोशल मीडिया पर इस घटना को पैसे लेकर बकरियां ढोने से जोड़ा गया, लेकिन चालक शरीफुल ने पैसे लेने की बात से इनकार किया. उसने दावा किया कि यह पहली बार था जब उसने एंबुलेंस में बकरियां ले जाईं और उसे इसके बदले कोई पैसा नहीं मिला.
कार्रवाई भी हुई
वीडियो वायरल होने के बाद बांग्लादेश में संबंधित नगरपालिका प्रशासन ने कार्रवाई की. रिपोर्टों के अनुसार, एंबुलेंस चालक से वाहन की चाबी ले ली गई और उसे ड्यूटी से अलग कर मामले की जांच शुरू की गई. Network Bangladesh ने भी इस घटना के बाद चालक को अस्थायी रूप से ड्यूटी से हटाए जाने और जांच की जानकारी दी है.
यानी जिस वीडियो को लेकर झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसी वीडियो की उपलब्ध बांग्लादेशी रिपोर्टिंग उसे मोंगला, बांग्लादेश की घटना से जोड़ती है.
इरफान अंसारी ने भाजपा पर किया पलटवार
वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भाजपा और भानु प्रताप शाही के आरोपों को खारिज किया. इरफान अंसारी ने कहा कि जिस एंबुलेंस का वीडियो दिखाया जा रहा है, वह झारखंड का नहीं है. उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो बांग्लादेश का है और सोशल मीडिया के जरिए झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था तथा उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.
अंसारी ने भाजपा नेता और विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को पहले अपने नेताओं को नियंत्रित करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई करेंगे और कथित तौर पर गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.अंसारी ने वीडियो को लेकर मानहानि का दावा करने की बात भी कही और कहा कि वह भाजपा के खिलाफ 10 करोड़ रुपये का मानहानि दावा करने जा रहे हैं.
सवाल सिर्फ एंबुलेंस का नहीं, वीडियो के इस्तेमाल का भी
इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग सवाल सामने आते हैं. पहला सवाल झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था का है. यदि राज्य में मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल रही है, तो सरकार को उस पर जवाब देना चाहिए. ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में एंबुलेंस की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार राजनीतिक बहस का विषय रही है.
लेकिन दूसरा सवाल उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है-क्या किसी दूसरे देश की घटना के वीडियो को झारखंड का बताकर राजनीतिक आरोप लगाया गया ? उपलब्ध बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टें इस वीडियो को मोंगला पोर्ट नगरपालिका की एंबुलेंस से जोड़ती हैं. Prothom Alo, NTV Online, Ittefaq और अन्य बांग्लादेशी मीडिया संस्थानों ने घटना की रिपोर्टिंग की है.
इसलिए फिलहाल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह कहना ज्यादा उचित होगा कि वायरल वीडियो में एंबुलेंस में बकरियां ले जाने की घटना वास्तविक है, लेकिन इसे झारखंड की घटना बताने का दावा सवालों के घेरे में है.
राजनीतिक बयानबाजी के बीच तथ्य की जांच जरूरी
भाजपा नेता भानु प्रताप शाही ने इस वीडियो के आधार पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर गंभीर सवाल उठाए. दूसरी ओर, अंसारी ने वीडियो को बांग्लादेश का बताते हुए आरोपों को खारिज किया और कानूनी कार्रवाई की बात कही. ऐसे में इस विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि वीडियो असली है या नकली, यह सवाल नहीं है; असली सवाल यह है कि वीडियो कहां का है और इसे किस संदर्भ में इस्तेमाल किया गया.
उपलब्ध बांग्लादेशी रिपोर्टों के आधार पर वीडियो का संबंध मोंगला पोर्ट नगरपालिका, बागेरहाट, बांग्लादेश की घटना से सामने आता है. इसलिए इसे झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था का वीडियो बताने से पहले उसके स्रोत और स्थान की पुष्टि करना जरूरी था.
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