RANCHI : राजधानी रांची में 2 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘नो UPI डे’ को लेकर व्यापारियों ने अपना फैसला बदल दिया है. झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स की उच्चस्तरीय बैठक के बाद व्यापारियों ने साफ किया है कि 2 अक्टूबर को UPI भुगतान बंद नहीं किया जाएगा. शहर की दुकानों पर QR कोड के जरिए रोज की तरह डिजिटल पेमेंट स्वीकार किया जाएगा. UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित शुल्क के विरोध में व्यापारियों ने आंदोलन का ऐलान किया था. हालांकि, चैंबर की बैठक के बाद फिलहाल UPI सेवाओं का बहिष्कार नहीं करने का निर्णय लिया गया है. व्यापारियों का कहना है कि शुल्क के मुद्दे पर उनका विरोध जारी रहेगा, लेकिन इसके लिए बाजार में डिजिटल पेमेंट को रोकना उचित नहीं होगा.
शुल्क के फैसले का किया जा रहा विरोध
झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों के मुताबिक, केंद्र सरकार के स्तर पर 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव है. इसमें 75 हजार रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 300 रुपये तक की सीमा बताए जाने की बात कही गई है. व्यापारी संगठन इस प्रस्ताव को लेकर पहले ही वित्त मंत्री को पत्र भेजकर शुल्क वापस लेने की मांग कर चुका है. हालांकि, विरोध के बावजूद 2 अक्टूबर को UPI भुगतान रोकने का फैसला वापस ले लिया गया है.
दुकानदारों ने बताया क्यों जरूरी है UPI
रांची के अल्बर्ट एक्का चौक समेत प्रमुख बाजारों में दुकानदारों से बातचीत में सामने आया कि बड़ी संख्या में कारोबारी UPI को अपने रोजमर्रा के कारोबार का अहम हिस्सा मानते हैं. दुकानदारों के मुताबिक, डिजिटल पेमेंट से कैश रखने और खुले पैसे की समस्या काफी हद तक कम हुई है. इसके अलावा, ग्राहकों के लिए भी मोबाइल से तुरंत भुगतान करना आसान हो गया है. कुछ व्यापारियों का कहना है कि UPI की सुविधा ने ग्राहकों की खरीदारी को भी आसान बनाया है. ऐसे में किसी एक दिन डिजिटल पेमेंट बंद करने से कारोबार प्रभावित होने की आशंका है.
छुट्टी के दिन UPI बंद करने से हो सकता था नुकसान
2 अक्टूबर को UPI सेवा बंद रखने का फैसला लागू होता तो गांधी जयंती की छुट्टी के बावजूद बाजार में खरीदारी करने वाले ग्राहकों को परेशानी हो सकती थी. व्यापारियों को भी डिजिटल भुगतान के जरिए होने वाले कारोबार का नुकसान उठाना पड़ता. फिलहाल व्यापारियों ने UPI बंद करने का फैसला टाल दिया है. यानी 2 अक्टूबर को रांची के बाजारों में QR कोड पहले की तरह काम करेंगे और ग्राहक सामान्य रूप से UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे. अब व्यापारियों का फोकस शुल्क के प्रस्ताव के विरोध और सरकार के सामने अपनी मांग रखने पर है, जबकि ग्राहकों के लिए डिजिटल पेमेंट की सुविधा फिलहाल जारी रहेगी.
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