PATNA/RANCHI : झारखंड और बिहार से जुड़ा विदेशों में संपत्ति और बैंक खातों की जांच का एक बड़ा मामला सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों राज्यों के डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों के विदेशों में ढाई सौ करोड़ रुपये से अधिक की रकम निवेश किए जाने की जानकारी मिली है. इस मामले में विदेशों में संपत्ति रखने और आयकर रिटर्न में उसकी जानकारी नहीं देने के आरोपों की जांच की जा रही है. प्रभात खबर में प्रकाशित आशुतोष दीक्षित की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), नई दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत विदेशों से वित्तीय जानकारी मिली थी. इसके बाद यह जानकारी जांच के लिए पटना स्थित बिहार-झारखंड विदेशी संपत्ति जांच इकाई (FAIU) को भेजी गई.
झारखंड के अस्सी और बिहार के सत्तर लोग जांच के दायरे में
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में झारखंड के करीब अस्सी और बिहार के करीब सत्तर लोग शामिल हैं. इन लोगों के विदेशों में ढाई सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति या निवेश होने की जानकारी सामने आई है. जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि क्या संबंधित लोगों ने आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय विदेशों में मौजूद अपनी चल-अचल संपत्तियों और बैंक खातों की जानकारी छिपाई थी. हालांकि, जांच में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों पर आरोप साबित हो चुके हैं. मामले में संबंधित जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई और निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे.

रांची, जमशेदपुर से लेकर छोटे शहरों तक के लोग
बताया जा रहा है कि जांच के दायरे में आने वाले लोगों में बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों के निवासी भी शामिल हैं.
रिपोर्ट में जिन शहरों का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- पटना
- रांची
- जमशेदपुर
- हाजीपुर
- सिवान
- गया
- बेगूसराय
- बक्सर
- मुजफ्फरपुर
- भागलपुर
- धनबाद
इन शहरों से जुड़े लोगों की विदेशों में संपत्ति और बैंक खातों से संबंधित जानकारी की जांच की जा रही है.
पंद्रह से ज्यादा देशों में बैंक खातों की जानकारी
रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, यूएई, सिंगापुर और रूस समेत पंद्रह से अधिक देशों से संबंधित बैंक खातों की जानकारी सामने आई है. इनमें कुछ लोग अलग-अलग प्रकार के वीजा पर विदेशों में रह रहे हैं. जांच का उद्देश्य विदेशों में मौजूद वित्तीय संपत्तियों और भारत में दाखिल आयकर रिटर्न के बीच संभावित अंतर का पता लगाना है.
कैसे मिलती है विदेशों में संपत्ति की जानकारी?
भारत कई देशों के साथ वित्तीय जानकारी साझा करने के अंतरराष्ट्रीय समझौतों से जुड़ा हुआ है. इनमें कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (CRS) और ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ इन्फॉर्मेशन (AEOI) जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं.इन समझौतों के तहत संबंधित देश वित्तीय खातों से जुड़ी जानकारी तय नियमों के अनुसार एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं. इससे कर अधिकारियों को विदेशों में रखी गई संपत्ति और बैंक खातों की जांच में मदद मिल सकती है.
जांच के बाद क्या होगा?
इस मामले में जांच एजेंसी विदेशों में मौजूद संपत्तियों, बैंक खातों और आयकर रिटर्न में दर्ज जानकारी का मिलान कर सकती है. यदि नियमों के उल्लंघन या अघोषित संपत्ति से जुड़े तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है.
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर यह मामला जांच के स्तर पर है. सभी संबंधित लोगों के खिलाफ आरोपों की पुष्टि और अंतिम कार्रवाई की जानकारी आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी.
