RANCHI / HAZARIBAGH : झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया के बीच हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड की ताजपुर पंचायत से मतदाता सूची को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. यहां करीब 190 लोगों के नाम Form-7 में दर्ज किए जाने और उन्हें मतदाता सूची से हटाने की सिफारिश किए जाने का दावा किया जा रहा है. इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन पर सवाल उठाए हैं.

ग्रामीणों के अनुसार, स्थानीय BLO सहजादी खातून को मतदाता सूची से नाम हटाने से संबंधित Form-7 के कई दस्तावेज सौंपे गए. आरोप है कि इन फॉर्मों पर पंकज बरनवाल और रवि विश्वकर्मा के नाम और हस्ताक्षर दर्ज हैं. विवाद उस समय और बढ़ गया, जब सामने आया कि सूची में खुद BLO और उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं. इसके अलावा पंचायत के पूर्व मुखिया शौकत खान का नाम भी कथित तौर पर नाम हटाने वाली सूची में दर्ज है.
एक ही समुदाय के लोगों के नाम होने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सूची में शामिल अधिकांश लोग एक ही समुदाय से आते हैं और वर्षों से ताजपुर पंचायत में रह रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इनमें कई लोग पहले भी चुनावों में मतदान कर चुके हैं और कुछ लोग पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधि भी रह चुके हैं. इसी आधार पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई. हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि Form-7 में दर्ज सभी नाम वास्तव में मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं या यह केवल नाम विलोपन के लिए शुरू की गई प्रक्रिया है. इसकी पुष्टि प्रशासन की जांच के बाद ही हो सकेगी.
पूर्व विधायक ने निर्वाचन अधिकारी से की बात
मामले ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। बरही के पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला यादव ने इस मामले को गंभीर बताते हुए हजारीबाग के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त से दूरभाष पर बातचीत की है. पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि एक समुदाय विशेष के लोगों को मताधिकार से वंचित करने की कथित कोशिश की जा रही है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
उपायुक्त ने दिया जांच का आश्वासन
मामले की जानकारी मिलने के बाद उपायुक्त ने निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है. अब प्रशासन के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि Form-7 में इतने बड़े पैमाने पर नाम दर्ज किए जाने का आधार क्या था और इन फॉर्मों को किस प्रक्रिया के तहत तैयार किया गया.
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
ताजपुर पंचायत का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने की प्रक्रिया के पीछे निर्धारित कारण और प्रक्रिया का पालन होना जरूरी है.
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं. करीब 190 लोगों के नाम Form-7 में किस आधार पर दर्ज किए गए? इन फॉर्मों को किसने भरकर जमा किया? फॉर्म पर दर्ज नाम और हस्ताक्षर की वास्तविकता क्या है? क्या सभी संबंधित मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचना दी गई? और यदि सूची में एक ही समुदाय के लोगों के नाम बड़ी संख्या में शामिल हैं, तो इसका कारण क्या है?
फिलहाल प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ताजपुर पंचायत में सामने आया यह मामला तकनीकी या प्रक्रियागत गड़बड़ी है या इसके पीछे किसी तरह की अनियमितता हुई है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि Form-7 की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं और यदि कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी.
