RANCHI : झारखंड के डुमरी से विधायक जयराम महतो एक बार फिर विवादों में हैं. इस बार मामला उनके विधायक आवास पर एक पत्रकार के साथ हुए कथित विवाद से जुड़ा है. पत्रकार का आरोप है कि इंटरव्यू के दौरान एक सवाल पूछने पर विधायक नाराज हो गए और बाद में कैमरा बंद करवाकर उसका मेमोरी कार्ड अपने पास रखवा लिया गया.

यह मामला उस समय सामने आया जब जोहार लाइव की पत्रकार कनिका राणा जयराम महतो का इंटरव्यू लेने उनके विधायक आवास पहुंची थीं. इंटरव्यू के दौरान उन्होंने विधायक के एक वायरल वीडियो को लेकर सवाल किया था. इसी सवाल के बाद बातचीत को लेकर विवाद होने का दावा किया गया है.
हालांकि, पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी विधायक जयराम महतो की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इसलिए पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.
वायरल वीडियो को लेकर पूछा गया था सवाल
पत्रकार कनिका राणा के मुताबिक, इंटरव्यू के दौरान उन्होंने जयराम महतो के उस वायरल वीडियो का जिक्र किया, जिसमें वह अधिकारियों और पुलिस पर पैसे की वसूली के आरोप लगाते नजर आते हैं. पत्रकार ने विधायक से सवाल किया कि आखिर वे किन अधिकारियों या पुलिस अधिकारियों पर वसूली का आरोप लगा रहे हैं और उनके पास इसे लेकर क्या जानकारी है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकार का दावा है कि इस सवाल पर जयराम महतो नाराज हो गए. आरोप है कि उन्होंने पत्रकार से कहा कि पहले खुद जाकर स्थिति देखें और उसके बाद सवाल करें. यहीं से बातचीत का माहौल बदलने की बात कही जा रही है.
फोन में सवाल देखकर पूछने पर भी विवाद
पत्रकार ने यह भी आरोप लगाया कि वह इंटरव्यू के दौरान अपने फोन में लिखे सवाल देखकर विधायक से प्रश्न कर रही थीं. इसी को लेकर भी कथित तौर पर आपत्ति जताई गई. पत्रकार के मुताबिक, उन्हें पहले पत्रकारिता सीखकर आने की बात कही गई. कनिका राणा का कहना है कि किसी इंटरव्यू के दौरान सवालों के नोट्स या फोन का इस्तेमाल करना असामान्य बात नहीं है. पत्रकार कई सवाल पहले से तैयार करके जाता है और बातचीत के दौरान कोई महत्वपूर्ण सवाल छूट न जाए, इसलिए नोट्स का सहारा लिया जा सकता है.
महिला पत्रकार से बातचीत को लेकर भी आरोप
पत्रकार ने बातचीत के दौरान अपने महिला पत्रकार होने का हवाला दिए जाने पर भी कथित विवाद की बात कही है. उनका आरोप है कि जब उन्होंने कहा कि महिला पत्रकार से इस तरह बात करना उचित नहीं है, तो कथित तौर पर उन्हें ‘विक्टिम कार्ड’ या ‘इमोशनल कार्ड’ खेलने जैसी बातें कही गईं. पत्रकार का यह भी दावा है कि बातचीत के दौरान एक महिला को बीच में लाकर स्थिति संभालने की कोशिश की गई. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है.
विवाद का सबसे अहम सवाल- मेमोरी कार्ड कहां है ?
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप कैमरे के मेमोरी कार्ड को लेकर है. पत्रकार कनिका राणा का आरोप है कि बातचीत के दौरान कैमरा बंद करवाया गया और कैमरे से मेमोरी कार्ड निकलवाकर अपने पास रखवा लिया गया. उनका कहना है कि वह और उनके कैमरामैन मेमोरी कार्ड वापस मिलने का इंतजार कर रहे थे
यही वह बिंदु है जिस पर पत्रकार ने विधायक से सवाल उठाया है कि अगर इंटरव्यू के दौरान कोई आपत्तिजनक या गलत बात नहीं हुई, तो फिर मेमोरी कार्ड अपने पास रखने की जरूरत क्यों पड़ी ? पत्रकार की मांग है कि मेमोरी कार्ड वापस किया जाए, ताकि पूरी रिकॉर्डिंग सामने आ सके और लोग खुद तय कर सकें कि बातचीत के दौरान वास्तव में क्या हुआ था.
पत्रकार का कहना- सवाल पूछना मेरा काम है
कनिका राणा का कहना है कि उनका जयराम महतो से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है. वह एक पत्रकार के तौर पर उनका इंटरव्यू लेने गई थीं और उनका काम सवाल पूछना था. उनका तर्क है कि अगर कोई जनप्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से किसी अधिकारी या पुलिस पर गंभीर आरोप लगाता है, तो पत्रकार का यह अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है कि वह उस बयान के आधार और उससे जुड़े तथ्यों पर सवाल पूछे.
यही सवाल इस पूरे विवाद के केंद्र में भी है—क्या किसी नेता के सार्वजनिक बयान पर पत्रकार द्वारा सवाल पूछना गलत है? पत्रकार का कहना है कि सवाल का जवाब देकर उसे गलत साबित किया जा सकता है, लेकिन सवाल पूछने वाले को ही कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है.
पत्रकार और नेता के बीच सवाल-जवाब की मर्यादा का मुद्दा
यह विवाद केवल एक इंटरव्यू या एक मेमोरी कार्ड तक सीमित नहीं है. इसके साथ पत्रकारिता और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की मर्यादा का सवाल भी जुड़ जाता है. एक पत्रकार के लिए कठिन सवाल पूछना उसके काम का हिस्सा है. वहीं, किसी जनप्रतिनिधि को अपने ऊपर लगाए गए सवालों का जवाब देने और अपना पक्ष रखने का अधिकार है.
लोकतांत्रिक व्यवस्था में दोनों पक्षों के बीच संवाद का आधार सवाल और जवाब ही हैं. विवाद तब पैदा होता है, जब सवाल पूछने और जवाब देने की प्रक्रिया आरोप-प्रत्यारोप में बदल जाती है. इस मामले में भी यही हुआ है या नहीं, यह पूरी रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
जयराम महतो के सामने अब क्या सवाल हैं?
मामले में पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद कुछ सवाल स्वाभाविक रूप से उठ रहे हैं।
- इंटरव्यू के दौरान वास्तव में क्या बातचीत हुई ?
- सवाल पूछे जाने पर विवाद क्यों हुआ?
- क्या कैमरा बंद करवाया गया था ?
- क्या मेमोरी कार्ड वास्तव में किसी ने अपने पास रखा ?
- अगर रखा गया तो उसकी वजह क्या थी ?
- क्या पूरी रिकॉर्डिंग सामने लाई जाएगी ?
- और सबसे महत्वपूर्ण, इस पूरे मामले पर विधायक जयराम महतो का पक्ष क्या है ?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी.
जयराम महतो पहले भी विवादों में रहे हैं
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब जयराम महतो पहले से ही एक अन्य विवाद को लेकर चर्चा में हैं. बरवाअड्डा थाना प्रभारी के साथ कथित गाली-गलौज वाले ऑडियो को लेकर भी विवाद चल रहा है और झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. ऐसे में विधायक आवास पर पत्रकार के साथ कथित विवाद ने उनके खिलाफ चल रही चर्चाओं को और बढ़ा दिया है.
हालांकि, दोनों मामलों को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखना जरूरी है और किसी भी आरोप को अंतिम सत्य मानने से पहले संबंधित पक्षों का जवाब और उपलब्ध साक्ष्यों को देखना जरूरी होगा.
अब सबकी नजर विधायक के जवाब पर
फिलहाल इस विवाद में पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोप सामने हैं. वहीं, मामले में जयराम महतो का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है. अगर पूरी बातचीत की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होती है और उसे सार्वजनिक किया जाता है, तो इससे विवाद से जुड़े कई सवालों का जवाब मिल सकता है.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इंटरव्यू के दौरान आखिर हुआ क्या था और मेमोरी कार्ड को लेकर पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोप पर विधायक जयराम महतो क्या जवाब देते हैं ? क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना पत्रकार का काम है और सवालों का जवाब देना जनप्रतिनिधि की सार्वजनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है. विवाद का समाधान भी इसी संवाद और तथ्यों के सामने आने से संभव है.
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