DHANBAD : कोयला चोरी और अवैध कारोबार को लेकर धनबाद में हेमंत सरकार ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है. सामने आई जानकारी के मुताबिक, कोयले की चोरी का तरीका भी बदल रहा है. साइकिल और बाइक के जरिए होने वाले अवैध परिवहन के बजाय अब आउटसोर्सिंग कंपनियों से हाईवा के माध्यम से कोयला कथित तौर पर अवैध बाजार और भट्ठों तक पहुंचाने की बात सामने आई है.
एक आकलन में दावा किया गया है कि कुछ आउटसोर्सिंग कंपनियों से निकलने वाले करीब 50 प्रतिशत तक कोयले को संगठित गिरोहों के जरिए चोरी के बाजार में खपाया जा रहा है. इस पूरे मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक उच्चस्तरीय बैठक में सीआईएसएफ और कोयला कंपनियों को कोयला चोरी पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए.
इसके बाद कोयला मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से स्थानीय पुलिस-प्रशासन के अपेक्षित सहयोग को लेकर सवाल उठाए गए. इससे झारखंड की छवि पर भी असर पड़ने की बात कही गई.
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हेमंत सोरेन के निर्देश पर धनबाद पहुंचे JMM सांसद
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर शुक्रवार को धनबाद में विशेष समीक्षा बैठक हुई. बैठक में झामुमो के तीन सांसद विजय हांसदा (राजमहल), डॉ. सरफराज अहमद और महुआ माजी शामिल हुए.
सांसदों ने अधिकारियों के साथ बैठक कर कोयला चोरी और अवैध परिवहन से जुड़े मामलों की जानकारी ली और संबंधित एजेंसियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा.
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कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में धनबाद के DC और SSP के साथ-साथ BCCL के CMD, ECL, SAIL और CISF के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. अधिकारियों से कोयला परिवहन की व्यवस्था और चोरी से जुड़े मामलों की स्थिति पर जानकारी ली गई.
बैठक में कोयला कंपनियों और संबंधित एजेंसियों से कई अहम बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं –
- हर दिन कोयला लेकर कितने वाहन गुजरते हैं?
- अवैध परिवहन और कोयला चोरी को लेकर कितनी शिकायतें दर्ज हुईं?
- कितने मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई?
- किन मामलों में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई?
