RANCHI : जिस सरकारी नौकरी के लिए अभ्यर्थियों ने पहले परीक्षा के लिए आंदोलन किया, फिर रिजल्ट के लिए प्रदर्शन किया और आखिरकार चयन के बाद नियुक्ति पत्र लेकर पदभार संभाला, अब उसी नौकरी को बचाने के लिए उन्हें दोबारा सड़क पर उतरना पड़ रहा है. मामला झारखंड में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के पद पर हुई नियुक्ति का है. खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के कुल 56 पदों पर भर्ती निकली थी, जिनमें 54 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था. चयनित अभ्यर्थियों के अनुसार, निर्धारित चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद उन्हें नियुक्ति पत्र दिया गया और उन्होंने करीब डेढ़ महीने पहले ही अपने पद पर योगदान दिया था. लेकिन अब नियुक्ति रद्द किए जाने के फैसले के बाद इन सभी अभ्यर्थियों की नौकरी पर संकट आ गया है.
पहला वेतन भी नहीं मिला, उससे पहले छिन गई नौकरी
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि नौकरी मिलने के बाद उन्होंने नई जिम्मेदारी संभाली ही थी. अभी उन्हें पहला वेतन तक नहीं मिला था, लेकिन नियुक्ति रद्द किए जाने के फैसले ने उनका रोजगार ही खत्म कर दिया. अभ्यर्थियों के मुताबिक, कई लोगों ने सरकारी नौकरी मिलने के बाद अपनी पुरानी नौकरियां तक छोड़ दी थीं. किसी ने परिवार की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक फैसले लिए, तो किसी ने झारखंड में नौकरी ज्वाइन करने के लिए अपना पूरा भविष्य इसी नियुक्ति से जोड़ लिया था. अब अचानक नियुक्ति रद्द होने से उनके सामने रोजगार और आर्थिक भविष्य का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
परीक्षा से नौकरी बचाने तक… तीन बार सड़क पर उतरे अभ्यर्थी
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी लड़ाई नई नहीं है. पहले उन्होंने परीक्षा कराने के लिए आंदोलन किया, इसके बाद रिजल्ट जारी कराने के लिए प्रदर्शन करना पड़ा और अब चयन होने के बाद नौकरी बचाने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है. प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि अगर चयन प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी उन अभ्यर्थियों पर क्यों डाली जा रही है, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी और सफल होने के बाद नियुक्ति हासिल की?
प्रोजेक्ट भवन से हटाए गए, अब कुटे मैदान में देंगे धरना
नियुक्ति बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरना दे रहे थे. वहां से हटाए जाने के बाद अब वे कुटे मैदान पहुंचेंगे और वहीं अपना आंदोलन जारी रखेंगे. कुटे मैदान में पहले से ही JSSC-CGL अभ्यर्थी धरने पर बैठे हैं. ऐसे में अब खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी के चयनित अभ्यर्थी भी उसी स्थान पर धरना देंगे.
जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो… लेकिन नौकरी न छीनी जाए
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए. यदि चयन प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों या संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाए. लेकिन उनका कहना है कि बिना किसी व्यक्तिगत गलती के चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी नहीं छीनी जानी चाहिए. अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद यह नौकरी हासिल की थी. नियुक्ति पत्र मिलने के बाद उन्हें लगा था कि अब उनका भविष्य सुरक्षित हो गया है, लेकिन डेढ़ महीने के भीतर ही नौकरी खत्म होने की स्थिति ने उन्हें फिर उसी संघर्ष में ला खड़ा किया है. अब चयनित अभ्यर्थी सरकार से नियुक्ति बहाल करने या पूरे मामले का ऐसा न्यायसंगत समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं, जिससे दोषियों पर कार्रवाई हो और निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों का रोजगार सुरक्षित रहे. उनका कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा.
