
रांची : अगर आपकी गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस समाप्त हो गया है, तो भविष्य में पेट्रोल या डीजल भरवाने में परेशानी हो सकती है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है.इस प्रस्ताव के तहत बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं देने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है.
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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिया यह निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन सड़कों पर चल रहे हैं, जिनका थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं है। ऐसे वाहनों से सड़क दुर्घटना होने पर पीड़ितों को मुआवजा मिलने में गंभीर दिक्कतें आती हैं.इसी समस्या को देखते हुए अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से समाधान तैयार करने को कहा है.
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरों और VAHAN डेटाबेस की मदद से वाहन का बीमा रिकॉर्ड जांचा जाएगा. यदि किसी वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वैध नहीं पाया जाता है, तो उसे ईंधन देने से रोका जा सकता है। इसके साथ ही नियमों के अनुसार ई-चालान जारी करने की व्यवस्था भी की जा सकती है.
नई गाड़ियों के लिए भी बड़ा सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया है कि नई कारों के लिए कम से कम चार वर्ष और नई दोपहिया गाड़ियों के लिए छह वर्ष का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य किया जाए. इसके अलावा पुलिस अधिकारियों को ऐसे मोबाइल ऐप या हैंडहेल्ड डिवाइस उपलब्ध कराने की भी सिफारिश की गई है, जिनकी मदद से मौके पर ही किसी वाहन के बीमा की स्थिति की जांच की जा सके.
क्या अभी से लागू हो गया है नियम?
नहीं। फिलहाल पूरे देश में ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने केवल केंद्र सरकार को पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है. इस योजना को लागू करने से पहले सरकार संबंधित एजेंसियों के साथ इसकी रूपरेखा तैयार करेगी. पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा.
वाहन मालिकों के लिए सलाह
हालांकि यह व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है, लेकिन सभी वाहन मालिकों के लिए समय पर अपने वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस रिन्यू कराना जरूरी है. इससे न केवल कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकेगा, बल्कि किसी दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक और कानूनी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी.
