रांची /गड़वा : झारखंड के गढ़वा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि 75 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग रतन लकड़ा को अपनी ही पेंशन की राशि समय पर नहीं मिल सकी. परिजनों का कहना है कि बैंक में ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उन्हें कई महीनों तक चक्कर लगाने पड़े और इलाज के लिए पैसे नहीं मिल पाए। बाद में उनकी मौत हो गई.

बुजुर्ग की मौत के बाद परिजन और स्थानीय ग्रामीण शव को लेकर बैंक पहुंचे और शाखा के मुख्य द्वार के सामने धरने पर बैठ गए. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे बैंक परिसर के सामने ही शव का अंतिम संस्कार करेंगे. इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है.
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क्या है पूरा मामला ?
मृतक रतन लकड़ा गढ़वा जिले के बड़गड़ प्रखंड के रहने वाले थे। परिजनों का आरोप है कि उनका पेंशन खाता स्थानीय Jharkhand Gramin Bank की बड़गड़ शाखा में था.
परिजनों के अनुसार, खाते में पेंशन की राशि उपलब्ध होने के बावजूद ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं होने का हवाला देकर उन्हें पैसे नहीं दिए गए. उनका कहना है कि इलाज के लिए तत्काल राशि की आवश्यकता थी, लेकिन बैंक से भुगतान नहीं हो सका, जिससे समय पर उपचार नहीं मिल पाया और रतन लकड़ा की मौत हो गई.
तीन महीने तक बैंक के चक्कर लगवाए गए
परिजनों का आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने करीब तीन महीने तक ई-केवाईसी के नाम पर उन्हें बार-बार शाखा बुलाया . उनका कहना है कि क्षेत्रीय कार्यालय के निर्देश पर वे गंभीर रूप से बीमार रतन लकड़ा को भी बैंक लेकर पहुंचे, जहां ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कराई गई. हालांकि, आरोप है कि इसके बाद भी खाते से राशि निकालने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें लगातार बैंक के चक्कर लगाने पड़े.
शव के साथ बैंक के बाहर धरना
रतन लकड़ा की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण उनका शव लेकर बैंक शाखा पहुंचे. उन्होंने शव को ताबूत में रखकर बैंक के मुख्य द्वार के सामने धरना शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यदि समय पर पेंशन की राशि मिल जाती, तो इलाज कराया जा सकता था.स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री Hemant Soren ने गढ़वा जिला प्रशासन को तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं.मुख्यमंत्री ने जिला उपायुक्त से पूरे मामले की शीघ्र जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है.
.@dc_garhwa उक्त मामले की शीघ्र जांच कर कड़ी कार्रवाई करते हुए सूचित करें। https://t.co/ySpVV3jx9B
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) July 7, 2026
प्रशासन भी हरकत में आया
जिला प्रशासन के अनुसार, मामले की जानकारी मिलते ही रंका के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) और लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) को विस्तृत जांच का जिम्मा सौंपा गया है.
प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी. साथ ही मृतक के परिजनों को नियमानुसार आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की भी बात कही गई है.
आदरणीय सर,
मामला संज्ञान में आते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीएम रंका एवं एलडीएम को शीघ्र विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांचोपरांत दोषी पाए जाने वाले सभी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जायेगी। नियमानुसार रतन लकड़ा के परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
— DC GARHWA (@dc_garhwa) July 7, 2026
सवाल केवल एक परिवार का नहीं
गढ़वा की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उन चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाती है जिनका सामना ग्रामीण और बुजुर्ग लाभार्थियों को बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करते समय करना पड़ता है.
डिजिटल बैंकिंग, ई-केवाईसी और पहचान सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं वित्तीय सुरक्षा के लिए आवश्यक मानी जाती हैं, लेकिन यदि इन्हें समय पर और संवेदनशील तरीके से पूरा नहीं किया जाए, तो जरूरतमंद लोगों के लिए यही प्रक्रिया बड़ी मुश्किल बन सकती है.
अब इस मामले में जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि रतन लकड़ा को समय पर पेंशन की राशि क्यों नहीं मिल सकी और क्या वास्तव में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी. फिलहाल, पूरे मामले की जांच जारी है.
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