रांची : झारखंड कैडर की वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी निधि खरे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है. उन्हें United Nations Conference on Trade and Development के उपभोक्ता संरक्षण कानून एवं नीति पर अंतर-सरकारी विशेषज्ञ समूह (Intergovernmental Group of Experts on Consumer Protection Law and Policy) की विशेष समिति का अध्यक्ष चुना गया है.

यह चयन न केवल झारखंड, बल्कि भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. इसे वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और विश्वसनीय नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है.
जिनेवा में होगी अहम बैठक
विशेष समिति की बैठक Geneva में आयोजित की जाएगी. इसमें दुनिया के विभिन्न देशों के प्रतिनिधि उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे.
सम्मेलन के दौरान डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार, उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा, जागरूकता बढ़ाने, सीमा-पार डिजिटल व्यापार और नई तकनीकों से उत्पन्न चुनौतियों जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है.
वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता प्रभाव
उपभोक्ता संरक्षण कानून और नीति से जुड़े इस अंतर-सरकारी विशेषज्ञ समूह की अध्यक्षता किसी भी देश के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. निधि खरे का चयन इस बात का संकेत है कि उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और नीतिगत सुधारों के क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह जिम्मेदारी भारत को वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी नीतियों और भविष्य की दिशा तय करने वाली चर्चाओं में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर देगी.
झारखंड के लिए भी गौरव का अवसर
झारखंड कैडर की अधिकारी होने के कारण निधि खरे की यह उपलब्धि राज्य के लिए भी गौरव का विषय है. उनके चयन से एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा रहे हैं. यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब डिजिटल सेवाओं के बढ़ते दायरे के साथ उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और प्रभावी नियामक व्यवस्था को लेकर दुनिया भर में व्यापक चर्चा हो रही है.
