रांची : झारखंड राज्य विद्युत कर्मचारियों के पेंशन फंड से जुड़े 109 करोड़ रुपये की कथित फर्जी निकासी के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की सहमति मिलने के बावजूद पिछले चार महीनों से झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी है. यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है. इस प्रकरण में केनरा बैंक ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले की जांच CBI से कराने की मांग की थी. सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत में शपथ-पत्र दाखिल कर कहा था कि यदि न्यायालय आदेश देता है तो एजेंसी इस मामले की जांच करने के लिए तैयार है.

इसके बाद न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने मामले को 28 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था. हालांकि, इसके बाद अब तक इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी है.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में केनरा बैंक में स्थित Jharkhand State Electricity Employees Master Trust के खाते से कथित रूप से जालसाजी कर 109 करोड़ रुपये निकाल लिए गए थे. इस ट्रस्ट में झारखंड बिजली बोर्ड के कर्मचारियों के पेंशन संबंधी धनराशि जमा रहती है.
घटना सामने आने के बाद ट्रस्ट की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. बाद में मामले की जांच झारखंड पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंप दी गई.
CID ने क्या कार्रवाई की ?
CID ने जांच के दौरान इस पूरे मामले को साइबर अपराध की श्रेणी में रखा और जांच पूरी करने के बाद आरोप-पत्र दाखिल किया. जांच के दौरान एजेंसी ने लगभग 46 करोड़ रुपये फ्रीज किए थे. साथ ही केनरा बैंक के कुछ अधिकारियों सहित छह लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था.
हालांकि, केनरा बैंक ने CID की जांच पर असंतोष जताते हुए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मामले की स्वतंत्र जांच CBI से कराने की मांग की.
हाईकोर्ट में क्या हुआ ?
वर्ष 2025 में याचिका की औपचारिक खामियां दूर किए जाने के बाद हाईकोर्ट में इस पर सुनवाई शुरू हुई. बैंक ने अपनी याचिका में राज्य सरकार, झारखंड बिजली बोर्ड, Jharkhand State Electricity Employees Master Trust, CBI समेत अन्य पक्षों को प्रतिवादी बनाया.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CBI को नोटिस जारी कर उसका पक्ष मांगा था। इसके जवाब में CBI ने अदालत को बताया कि यदि न्यायालय जांच का आदेश देता है, तो वह इस मामले की जांच करने के लिए तैयार है.
CBI की सहमति के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 28 जनवरी 2026 की तिथि तय की थी, लेकिन उसके बाद से यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो पाया है.
फर्जी निकासी कैसे हुई ?
जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से सरकारी संस्था JTDC के नाम पर एक फर्जी बैंक खाता खोला गया था. इसी खाते का इस्तेमाल कर ट्रस्ट के खाते से 109 करोड़ रुपये की निकासी की गई.
रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी संस्थाओं के बीच होने वाले बड़े वित्तीय लेनदेन की सूचना उन केंद्रीय निगरानी एजेंसियों को अनिवार्य रूप से नहीं भेजी जाती, जो सामान्य बैंक खातों में एक निश्चित सीमा से अधिक के लेनदेन पर नजर रखती हैं. माना जा रहा है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कथित धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया.
मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन
फिलहाल यह मामला झारखंड हाईकोर्ट में लंबित है. CBI ने जांच के लिए अपनी सहमति पहले ही अदालत के समक्ष दर्ज करा दी है, लेकिन अंतिम निर्णय न्यायालय को लेना है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मामले की अगली सुनवाई कब होती है और अदालत CBI जांच को लेकर क्या आदेश देती है.
