Ranchi /New delhi : केंद्र सरकार ने विदेशी फंड लेने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है. गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए नियमों के तहत अब NGO को यह बताना होगा कि वे किस काम के लिए विदेशी फंड ले रहे हैं, पैसा कहां से आ रहा है और उसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है.सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद विदेशी फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.

धर्म परिवर्तन से जुड़ी गतिविधियां नहीं होंगी शामिल
नए नियमों के तहत NGO को सरकार की तय सूची में से अपनी गतिविधियां चुननी होंगी. इसमें शिक्षा, सामाजिक कार्य, संस्कृति, धर्म और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
हालांकि धार्मिक गतिविधियों की अनुमति होगी, लेकिन धर्म परिवर्तन से जुड़ी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है. सरकार ने कहा है कि धार्मिक शिक्षा, प्रवचन, सत्संग या आदिवासी परंपराओं के संरक्षण जैसे काम धर्म परिवर्तन के बिना किए जाने चाहिए.
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फंड का असली स्रोत बताना होगा
अगर किसी NGO को पैसा किसी दूसरी संस्था या फंड के जरिए मिलता है, तो उसे यह भी बताना होगा कि असली दानदाता कौन है. यानी पैसा आखिरकार कहां से आया, इसकी पूरी जानकारी देनी होगी.
सोशल मीडिया अकाउंट की भी जानकारी देनी होगी
अब विदेशी फंड लेने वाले NGO को FCRA रजिस्ट्रेशन या उसके नवीनीकरण के समय अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी भी देनी होगी.
इसके अलावा संस्था के प्रमुख लोगों ने कोई किताब, लेख या अन्य सामग्री प्रकाशित की है तो उसकी जानकारी भी देनी होगी.
विदेशी नागरिकों पर सख्ती
अगर किसी NGO के प्रमुख पदों पर विदेशी नागरिक हैं, तो ऐसे मामलों में FCRA रजिस्ट्रेशन देने पर आमतौर पर विचार नहीं किया जाएगा.
हालांकि विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार अलग से अनुमति दे सकती है.
हर साल देनी होगी काम की रिपोर्ट
अब NGO को सिर्फ खर्च का हिसाब नहीं देना होगा, बल्कि यह भी बताना होगा कि उन्होंने सालभर में कौन-कौन से काम किए.
सरकार जरूरत पड़ने पर फील्ड जांच भी कर सकेगी, ताकि यह देखा जा सके कि विदेशी फंड का सही इस्तेमाल हुआ है या नहीं.
राज्यों और काम का उद्देश्य बताना होगा
NGO को यह भी बताना होगा कि वह किन राज्यों में काम करना चाहता है और विदेशी फंड का उपयोग किस उद्देश्य के लिए करेगा। यह जानकारी उसके रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र में दर्ज होगी.
निष्क्रिय संस्थाओं पर भी नजर
सरकार ने ऐसे NGO पर भी सख्ती की है जो सिर्फ रजिस्ट्रेशन बनाए रखते हैं लेकिन काम नहीं करते. अब रजिस्ट्रेशन जारी रखने के लिए यह दिखाना होगा कि पिछले दो वर्षों में विदेशी फंड का इस्तेमाल घोषित गतिविधियों पर किया गया है.
क्या है सरकार का तर्क?
सरकार का कहना है कि नए नियमों से विदेशी फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ेगी और यह सुनिश्चित होगा कि पैसा उसी काम में खर्च हो, जिसके लिए उसे लिया गया है.
हालांकि कुछ सामाजिक संगठनों का मानना है कि इससे NGO पर कागजी प्रक्रिया और निगरानी का बोझ बढ़ सकता है.
फिलहाल नए नियमों के बाद विदेशी फंड लेने वाले सभी संगठनों को अपने कामकाज और फंडिंग से जुड़ी जानकारी पहले से ज्यादा विस्तार से देनी होगी.
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