RANCHI : झारखंड हाई कोर्ट ने लैब असिस्टेंट प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े मामले में अभ्यर्थियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने उस शर्त को रद्द कर दिया है, जिसमें अभ्यर्थियों के लिए स्नातक स्तर पर संबंधित विषयों को 2 या 3 साल तक पढ़ना अनिवार्य किया गया था. कोर्ट के इस फैसले से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को राहत मिली है.
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झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी भर्ती विज्ञापन की शर्तें वैधानिक नियमों से ऊपर नहीं हो सकतीं. अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया झारखंड गवर्नमेंट स्कूल्स टीचर एंड नॉन-टीचिंग स्टाफ अपॉइंटमेंट एंड सर्विस कंडीशंस रूल्स 2012 और उसके संशोधित नियमों के तहत संचालित होती है.
कोर्ट ने कहा कि इन नियमों में कहीं भी यह नहीं लिखा गया है कि अभ्यर्थियों को संबंधित विषय 2 या 3 वर्षों तक पढ़ना जरूरी होगा. ऐसे में विज्ञापन में जोड़ी गई यह अतिरिक्त शर्त नियमों के खिलाफ मानी गई. अदालत ने डॉ. मीता सहाय बनाम बिहार राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि यदि विज्ञापन और वैधानिक नियमों में टकराव हो, तो नियम ही मान्य होंगे.
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी पर दोबारा विचार करें. साथ ही योग्यता की गणना विज्ञापन की अतिरिक्त शर्त के बजाय 2012 के नियमों के आधार पर की जाए.
अदालत ने पहले जारी किए गए अयोग्यता नोटिस को भी रद्द कर दिया है. कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया को 10 सप्ताह के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है.
दरअसल झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने लैब असिस्टेंट के 690 पदों के लिए निकाले गए विज्ञापन में यह शर्त जोड़ी थी कि अभ्यर्थियों ने भौतिकी, रसायन या जीव विज्ञान विषय को स्नातक में कम से कम 2 या 3 वर्षों तक ऑनर्स या सब्सिडियरी के रूप में पढ़ा हो. इसी आधार पर कई अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित किया गया था, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा.
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